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झारखंड में जेपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर भाजपा ने एक बार फिर हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने मांग की है कि जेपीएससी के तीनों सदस्यों को तत्काल पद से हटाया जाए, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।

आदित्य साहू ने कहा कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन आयोग के तीनों सदस्य अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक ये सदस्य अपने पद पर रहेंगे, तब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं होगी। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि तीनों सदस्यों को तुरंत बर्खास्त कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केवल इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष के खिलाफ अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई और उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि तत्कालीन अध्यक्ष के साथ-साथ आयोग के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय मामलों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं को न्याय दिलाने के बजाय सरकार इन मामलों की लीपापोती करने में लगी हुई है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जेपीएससी, जेएसएससी और उत्पाद सिपाही भर्ती सहित पिछले छह वर्षों में हुई सभी कथित भर्ती गड़बड़ियों की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि सीबीआई जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो सकेगी। आदित्य साहू ने बताया कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में भाजपा के झारखंड के सांसदों ने बुधवार को संसद भवन के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भी झारखंड के भाजपा सांसद संसद परिसर में एक घंटे का मौन उपवास रखकर छात्रों और युवाओं के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करेंगे। आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी कीमत पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार की सीआईडी जांच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी जांच केवल औपचारिकता है और इससे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में छात्रों और युवाओं के हित में काम करना चाहते हैं तो उन्हें तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और आयोग के सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि केवल सीबीआई जांच से ही भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की सच्चाई सामने आ सकेगी और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई संभव होगी।

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