झारखंड भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में कथित रूप से जारी अवैध बालू खनन और परिवहन को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा मॉनसून के दौरान नदियों से बालू उठाव पर रोक लगाए जाने के बावजूद रांची सहित झारखंड के कई जिलों में बिना नंबर प्लेट और बिना वैध चालान के बालू लदे ट्रक खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं। प्रतिबंध के बावजूद बालू का अवैध खनन और परिवहन जारी है बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और राज्य की राजस्व व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उनके अनुसार, यदि प्रतिबंध के बावजूद बालू का अवैध खनन और परिवहन जारी है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अवैध और अनियंत्रित बालू खनन से नदियों की प्राकृतिक धारा प्रभावित होती है। इससे भूजल स्तर में गिरावट आती है, नदी तटों का कटाव बढ़ता है और पर्यावरणीय संतुलन को लंबे समय तक नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती बरतना जरूरी है। मरांडी ने सवाल उठाया कि जब एनजीटी की रोक लागू है, तब भी अवैध बालू का कारोबार आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ट्रैफिक कैमरों के माध्यम से आम लोगों की बाइक और कार का चालान आसानी से काटा जा सकता है, तो बिना नंबर प्लेट के चल रहे बालू लदे ट्रकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। उन्होंने पूछा कि क्या कानून का पालन केवल आम नागरिकों के लिए ही है? नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध बालू खनन और परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा झारखंड की नदियों और पर्यावरण की रक्षा के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार को हो रहे राजस्व नुकसान को भी रोका जा सकता है। Post navigation साहिबगंज से संदिग्ध आतंकी की कथित गर्लफ्रेंड गिरफ्तार, STF की बड़ी कार्रवाई