दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने के बाद मलबे में फंसे छात्रों ने खुद फोन कर मदद मांगी। हादसे के तुरंत बाद कुछ छात्रों ने अपने दोस्तों और परिचितों को फोन किया। इसी दौरान मलबे में फंसे छात्रों ने ब्लिंकइट की एंबुलेंस को भी कॉल किया। बचाव कार्य शुरू होने के दौरान ब्लिंकइट की एंबुलेंस सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाली टीमों में शामिल रही। बचाव कार्य में जुटे लॉ स्टूडेंट के अनुसार, इमारत के मलबे में फंसे छात्रों ने ही फोन करके ब्लिंकइट की एंबुलेंस बुलाई थी। उनका कहना है कि फायर ब्रिगेड, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों के पहुंचने से पहले ही ब्लिंकइट की एंबुलेंस गली में पहुंच चुकी थी। एंबुलेंस की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया। आसपास के लोग भी जुट गए बचाव कार्य में ब्लिंकइट कर्मचारी ने बताया कि ऐप के जरिए सबसे पहले मदद की कॉल उनकी टीम को मिली थी। उनकी एंबुलेंस सफदरजंग अस्पताल में तैनात रहती है। ब्लिंकइट की क्लस्टर मैनेजर अर्चना सुरमा के मुताबिक, हादसे के दौरान करीब 1:40 बजे पहली कॉल आई थी। इसके लगभग 10 मिनट बाद एंबुलेंस टीम घटनास्थल पर पहुंच गई थी। हादसे के बाद आसपास के लोग भी बचाव कार्य में जुट गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि शुरुआत में जब तक पर्याप्त राहत और बचाव व्यवस्था मौके पर नहीं पहुंची थी, तब तक उन्होंने खुद ही मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया था। लोग भारी कंक्रीट के स्लैब हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि मलबे के अंदर से छात्रों की आवाजें और फोन कॉल आ रही थीं। ऐसे में लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना बचाव कार्य में हिस्सा लिया। किसी ने मलबा हटाया, तो किसी ने अंदर फंसे लोगों से बात कर उन्हें हिम्मत दी। लोगों की कोशिश थी कि जल्द से जल्द मलबे में फंसे छात्रों को बाहर निकाला जा सके। मौके पर पहुंचे बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने भी बताया था कि मलबे में फंसे लोगों के फोन आ रहे थे। बचाव दल उनसे लगातार संपर्क में था। उन्होंने सभी लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने की प्रार्थना की थी। स्थानीय निवासी के अनुसार, जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें करीब 15 कमरे थे। हर कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। इस हिसाब से इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। बताया गया कि यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से थे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बगल की इमारत की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। लोगों का दावा था कि पड़ोस की इमारत भी सुरक्षित नहीं लग रही थी और वह थोड़ी झुकी हुई दिखाई दे रही थी। इसके बाद लोगों ने प्रशासन से आसपास की इमारतों की भी जांच कराने की मांग की, ताकि दोबारा कोई बड़ा हादसा न हो। Post navigation फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान मौत मामले में नया मोड़, बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए