24 जिलों और 200 से ज्यादा प्रखंडों में आंदोलनकारियों का मशाल जुलूस आज , 30 सितंबर को झारखंड बंद का ऐलान झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा द्वारा 24 जिला एवं 200 से ज्यादा प्रखंडों में आहूत मशाल जुलूस का कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम झारखंड आंदोलनकारियों के अधिकारों, उनके बच्चों के रोजगार और आंदोलनकारियों के सम्मान एवं स्वाभिमान की मांग को लेकर आयोजित है। मोर्चा ने कहा कि सरकार से लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद कई मांगों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मशाल जुलूस के जरिए आंदोलनकारियों ने सरकार से अपने अधिकारों और मांगों को जल्द पूरा करने की मांग करेंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही आंदोलनकारियों और उनके परिवारों को सरकारी स्तर पर उचित सम्मान और अलग पहचान देने की मांग की जा रही है। आंदोलनकारियों के बच्चों को 100 प्रतिशत रोजगार की मांग झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगों में आंदोलनकारियों के पुत्र-पुत्रियों और आश्रितों के लिए रोजी-रोजगार और नौकरी की 100 प्रतिशत गारंटी शामिल है। मोर्चा का कहना है कि अलग राज्य के आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों के परिवारों के भविष्य की जिम्मेदारी सरकार को उठानी चाहिए। इसके अलावा आंदोलनकारियों को पेंशन देने के लिए जेल जाने की बाध्यता समाप्त करने और सभी आंदोलनकारियों को सम्मानजनक पेंशन देने की मांग की गई है। मोर्चा के अनुसार सरकार की ओर से 50-50 हजार रुपये पेंशन देने का आश्वासन दिया गया था। आंदोलनकारी अब इस आश्वासन को लागू करने की मांग कर रहे हैं। पुष्कर महतो बोले- आंदोलनकारी लगातार परेशान हैं झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक और प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने सरकार पर आंदोलनकारियों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद से बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी अब इस दुनिया में नहीं रहे और जो आंदोलनकारी जीवित हैं, उनमें भी कई लोग बीमारी, आर्थिक परेशानी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। पुष्कर महतो ने दावा किया कि राज्य गठन के बाद अब तक करीब 20 से 25 हजार आंदोलनकारियों की मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आंदोलनकारी आज भी किसी न किसी बीमारी से परेशान हैं। कई लोग आर्थिक तंगी और कुपोषण जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ आंदोलनकारी सामाजिक उत्पीड़न के शिकार हैं। पुष्कर महतो ने कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों और सरकार के आश्वासनों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण पूरे राज्य के आंदोलनकारियों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि सरकार के संकल्पों को लागू नहीं किए जाने से यह आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को आयोजित मशाल जुलूस इसी नाराजगी का प्रदर्शन है। उनके अनुसार यह आंदोलन अब 30 सितंबर को प्रस्तावित झारखंड बंद के रूप में आगे बढ़ेगा। मोर्चा का कहना है कि झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों और उनके परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। आंदोलनकारियों ने राजकीय सम्मान, अलग पहचान, पेंशन और उनके बच्चों के रोजगार समेत अपनी मांगों को जल्द लागू करने की मांग दोहराई है। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने कहा कि आंदोलनकारियों के अधिकारों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। मोर्चा के अनुसार जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने की रणनीति पर आगे भी कार्यक्रम किए जाएंगे। Post navigation मुख्यमंत्री का बड़ा विजन: रांची को IT हब बनाने की तैयारी, 75 हजार रोजगार के लक्ष्य पर बढ़ेगा झारखंड SIR पर निर्वाचन विभाग की राजनीतिक दलों से बैठक, 60 दिन तक बढ़ सकती है सुनवाई अवधि