रांची से करीब 35 किलोमीटर दूर कांके अंचल के पिठोरिया थाना क्षेत्र में स्थित घुमावदार घाटी को लंबे समय से ‘पतरातू वैली’ के नाम से प्रचारित किए जाने पर अब सवाल उठने लगे हैं। आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक ने इस नाम को भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से गलत बताते हुए घाटी का नाम ‘पिठोरिया घाटी’ करने की मांग की है। सरकारी रिकॉर्ड और पर्यटन विभाग में नाम सुधारने की अपील समिति के संयोजक लक्ष्मीनारायण सिंह मुंडा का कहना है कि जिस घाटी को पतरातू वैली कहा जा रहा है, वह वास्तव में रांची जिले के कांके प्रखंड और पिठोरिया थाना क्षेत्र में आती है। वहीं पतरातू रामगढ़ जिले का जनगणना कस्बा है। घाटी कांके विधानसभा और रांची लोकसभा क्षेत्र में स्थित है। समिति का दावा है कि कई मानचित्रों में भी इस क्षेत्र का पता ‘कांके-पतरातू रोड, रांची’ के रूप में दर्ज है। पतरातू डैम रामगढ़ जिले में स्थित है, लेकिन घाटी और वहां तक जाने वाली सड़क पिठोरिया-कांके क्षेत्र से जुड़ी है। इसके बावजूद पर्यटन विभाग की वेबसाइट, समाचारों, सोशल मीडिया और सरकारी योजनाओं में इसे लगातार ‘पतरातू वैली’ के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। समिति का कहना है कि गलत नाम के प्रचार से कांके क्षेत्र की भौगोलिक और स्थानीय पहचान प्रभावित हो रही है। उसका आरोप है कि पर्यटन से मिलने वाला राजस्व, विकास कार्यों का श्रेय और राजनीतिक लाभ पतरातू-रामगढ़ क्षेत्र के हिस्से में चला जाता है, जबकि घाटी की जमीन और वहां का बुनियादी ढांचा कांके क्षेत्र के ग्रामीणों से जुड़ा है। मामले को सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ते हुए समिति ने सोहराय पेंटिंग का उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, सोहराय पेंटिंग को जीआई टैग प्राप्त है और सरकार घाटी की दीवारों पर इससे जुड़ी चित्रकारी कराने की योजना बना रही है। ऐसे में समिति का कहना है कि घाटी का सही भौगोलिक नाम होना सांस्कृतिक पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकार से तीन प्रमुख मांगें आदिवासी समन्वय समिति ने सरकार से इस मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की है। समिति ने कहा है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के माध्यम से कांके अंचल के सरकारी अभिलेखों में घाटी का औपचारिक नाम ‘पिठोरिया घाटी’ दर्ज किया जाए। इसके अलावा झारखंड पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट, ब्रोशर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ‘पतरातू वैली’ नाम हटाकर सही नाम दर्ज करने की मांग की गई है। समिति ने यह भी कहा है कि गूगल मैप्स, ओपनस्ट्रीटमैप समेत अन्य मानचित्र सेवाओं पर घाटी की गलत लेबलिंग को ठीक कराने के लिए सरकार संबंधित कंपनियों से संपर्क करे। समिति ने स्पष्ट किया है कि उसकी मांग किसी दूसरे जिले के गौरव को कम करने के लिए नहीं है। उसका कहना है कि यह केवल क्षेत्र की सही भौगोलिक और प्रशासनिक पहचान सामने लाने की मांग है। समिति ने सरकार से दस्तावेजों और वास्तविक भौगोलिक स्थिति के आधार पर नाम को दुरुस्त करने की अपील की है। Post navigation आदित्यपुर – वेज रोल के ऑर्डर में देरी बनी खूनी विवाद की वजह, चाकूबाजी में युवक की मौत