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JSSC-CGL परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा को लेकर लगातार नए सवाल और खुलासे सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार कोर्ट के आदेश की व्याख्या का हवाला देकर कार्रवाई से बचती नजर आ रही है। मरांडी ने सवाल किया कि अगर JSSC-CGL मामले में सरकार के सामने कार्रवाई करने की मजबूरी है, तो फिर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के प्रभारी चेयरमैन आईएएस प्रशांत कुमार और सचिव सुधीर गुप्ता को पद से हटाने, उनकी भूमिका की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने में सरकार की क्या मजबूरी है? उन्होंने कहा कि मामले में जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। केवल परीक्षा रद्द करने या नहीं करने का सवाल ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करना भी जरूरी है।

बाबूलाल मरांडी ने JPSC से जुड़े पुराने विवाद का उदाहरण देते हुए भी सरकार पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि JPSC मामले में इस्तीफा देने वाले ख्यांगते को जेल जाना पड़ा था, तो JSSC से जुड़े मामले में इस्तीफा देने वाले नीरज सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की। भाजपा नेता ने उन नामों की भी जांच कराने की मांग की, जो कथित तौर पर पैसे देकर नौकरी हासिल करने के आरोपों के संबंध में चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो ऐसे लोगों की नियुक्ति तत्काल रद्द की जानी चाहिए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को केवल वायरल हो रहे नाम या आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। इसके लिए आधिकारिक और निष्पक्ष जांच जरूरी है। बाबूलाल मरांडी ने आंदोलन कर रहे छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए पूरे मामले को CBI के हवाले करने की मांग की। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों के मन में जो संदेह पैदा हुआ है, उसे दूर करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवालों का जवाब देने और ठोस कार्रवाई करने की मांग की। मरांडी ने कहा कि सरकार की नीयत साफ है तो उसे पहले मामले से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच, कथित अनियमितताओं की पड़ताल और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगों का समाधान किए बिना केवल आंदोलन खत्म कराने की कोशिश से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से आंदोलनकारी छात्रों की बात सुनने और उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। JSSC-CGL विवाद में अब सरकार के सामने परीक्षा, अधिकारियों की भूमिका, कथित अनियमितताओं और जांच की मांग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि वह छात्रों की मांगों और विपक्ष के सवालों पर क्या कदम उठाती है।

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