झारखंड के अलग राज्य के आंदोलन में योगदान देने वाले शहीद देवेंद्र मांझी की 32वीं पुण्यतिथि पर आंदोलनकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की ओर से डोरंडा स्थित देवेंद्र मांझी चौक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने शहीद को याद करते हुए उनके सम्मान में नारे लगाए और झारखंड के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में शहीद देवेंद्र मांझी अमर रहें, जब तक सूरज-चांद रहेगा, देवेंद्र मांझी का नाम रहेगा और जंगल के पहरेदार देवेंद्र मांझी अमर रहें जैसे नारे गूंजते रहे। उपस्थित लोगों ने उनके जीवन, संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन के इतिहास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। झारखंड आंदोलन को आगे बढ़ाने में दिया योगदान झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि देवेंद्र मांझी ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को गति देने के लिए संघर्ष किया था। वे जंगल और वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी लगातार आवाज उठाते रहे। जंगल के पहरेदार के रूप में संघर्ष करते हुए उन्होंने आज ही के दिन अपनी शहादत दी थी। पुष्कर महतो ने कहा कि देवेंद्र मांझी के संघर्ष और बलिदान को उसके उद्देश्य तक पहुंचाना झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा का दायित्व है। उन्होंने शहीदों के विचारों और उनके संघर्ष को जीवित रखने की जरूरत पर जोर दिया। मोर्चा के दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल प्रभारी अंथन लकड़ा ने कहा कि देवेंद्र मांझी ने झारखंड के अस्तित्व, अस्मिता और पहचान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने शोषण, अन्याय, अत्याचार और दमन के खिलाफ आवाज उठाई और इसी संघर्ष में अपना बलिदान दिया। अंथन लकड़ा ने कहा कि देवेंद्र मांझी के त्याग और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज आज भी खेतों, खलिहानों, जंगलों, पहाड़ों, झरनों और गांवों के हाट-बाजारों में सुनाई देती है। उनके संघर्ष की याद झारखंड के लोगों को अपने अधिकारों और पहचान के प्रति जागरूक करती है। आंदोलनकारियों ने लिया संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सिमोन तिग्गा, यशायाह तिग्गा, किस्टो दास और अनंत कुमार समेत कई झारखंड आंदोलनकारी उपस्थित रहे। सभी ने शहीद देवेंद्र मांझी को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड आंदोलन के शहीदों के संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उनके विचारों को याद रखते हुए राज्य के अस्तित्व, पहचान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बनाए रखनी चाहिए। आंदोलनकारियों ने शहीद देवेंद्र मांझी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। Post navigation गिरिडीह में बस कंडक्टर से मारपीट का मामला, बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल धनबाद: पिस्टल छीनकर पुलिस पर चलाई गोली, जवाबी फायरिंग में शंकर डे के पैर में लगी दो गोलियां