झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का बुधवार, 7 अक्टूबर को रांची के बरियातू स्थित हिल व्यू अस्पताल में निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से बीमार चल रही थीं और अस्पताल में उनका इलाज जारी था। चिकित्सकों के अनुसार, बुधवार को उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई थी। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए थी। रूपी सोरेन के निधन की खबर सामने आते ही सोरेन परिवार, झामुमो नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और उनके करीबियों में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिवार के लिए यह बेहद दुखद समय है। इससे पहले अगस्त 2025 में शिबू सोरेन के निधन के बाद अब करीब 14 महीने के भीतर परिवार को दूसरी बड़ी क्षति हुई है। 18 सितंबर को अस्पताल में हुई थीं भर्ती रूपी सोरेन की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी। सांस लेने में परेशानी के बाद उन्हें 18 सितंबर को रांची के हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। इससे पहले उनका इलाज हैदराबाद में भी कराया गया था। रांची लौटने के बाद भी डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे थे। बुधवार को उनकी स्थिति अचानक गंभीर हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी हृदय गति को लेकर भी परेशानी बढ़ी। स्थिति को देखते हुए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक गुप्ता और न्यूरो मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. उज्ज्वल राय समेत अन्य चिकित्सकों को अस्पताल बुलाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्थिति संभालने के लिए जरूरी उपचार किया और लगातार निगरानी जारी रखी। मां की तबीयत के कारण सीएम ने कार्यक्रम किए रद्द मां की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार के अपने कई निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए थे। शाम को होने वाली राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक भी स्थगित कर दी गई। मुख्यमंत्री खुद अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से अपनी मां के स्वास्थ्य की जानकारी ली। कल्पना सोरेन भी अस्पताल में मौजूद रहीं। रूपी सोरेन की गंभीर स्थिति की जानकारी मिलने के बाद राज्य सरकार के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामेश्वर उरांव समेत कई नेता भी अस्पताल पहुंचे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। शिबू सोरेन के संघर्ष के दौर में संभाला परिवार, परिवार के लिए मजबूत सहारा थीं रूपी सोरेन रूपी सोरेन झारखंड के आंदोलन और राजनीति के उस दौर की भी साक्षी रहीं, जब उनके पति शिबू सोरेन अलग झारखंड राज्य और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय थे। शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेताओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जब शिबू सोरेन राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों में व्यस्त रहते थे, तब रूपी सोरेन ने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने सार्वजनिक राजनीति से दूरी बनाए रखते हुए परिवार को मजबूती से संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रूपी सोरेन को सोरेन परिवार में एक महत्वपूर्ण और मजबूत आधार के रूप में देखा जाता था। उन्होंने लंबे समय तक परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। हेमंत सोरेन के राजनीतिक जीवन के दौरान भी मां के साथ उनके भावनात्मक संबंध हमेशा चर्चा में रहे। शिबू सोरेन के निधन के बाद परिवार के लिए रूपी सोरेन का महत्व और बढ़ गया था। अब उनके निधन से परिवार ने एक और करीबी सदस्य को खो दिया है। रूपी सोरेन के पति और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हुआ था। वह झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं और झामुमो के संस्थापक नेताओं में शामिल थे। उनके निधन के करीब 14 महीने बाद अब रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार पर एक बार फिर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। हेमंत सोरेन ने मां को याद कर लिखा भावुक संदेश मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि “बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं। आज वह छाँव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं।” मुख्यमंत्री ने अपनी मां को याद करते हुए लिखा कि उनके जाने से जीवन में एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। मां के निधन के बाद उनका यह भावुक संदेश परिवार के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक रूपी सोरेन के निधन की खबर के बाद झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर है। विभिन्न दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, झामुमो कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। लोग रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं। रूपी सोरेन का जीवन भले ही सक्रिय राजनीति से दूर रहा हो, लेकिन झारखंड की राजनीति के एक बड़े परिवार के साथ उनका जुड़ाव रहा। शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक संघर्ष के दौरान परिवार को संभालने और अगली पीढ़ी को साथ लेकर चलने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके निधन से सोरेन परिवार ने एक ऐसी सदस्य को खो दिया है, जो परिवार के लिए लंबे समय तक भावनात्मक सहारा बनी रहीं। Post navigation वियतनाम में मृत प्रवासी कामगार राजा कुमार वर्मा के आश्रितों को मिली 5 लाख रुपये की सहायता