बिहार में लोगों को जल्द ही तेज और आधुनिक रेल यात्रा की सुविधा मिलने वाली है। राज्य सरकार ने चार प्रमुख शहरों और कॉरिडोर को जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम को दी गई है। इस कार्य के लिए 31.59 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी गई है। सरकार की योजना के अनुसार बिहार में चार प्रमुख रूटों पर रैपिड ट्रेन चलाई जाएगी। ये सभी कॉरिडोर पटना को आसपास के प्रमुख शहरों और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले मार्गों से जोड़ेंगे। प्रस्तावित कॉरिडोर हैं – पटना-गया, पटना एयरपोर्ट-बेगूसराय, पटना-हाजीपुर-सोनपुर एयरपोर्ट-मुजफ्फरपुर और पटना एयरपोर्ट-आरा इन सभी रूटों का सर्वे और डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना की कुल लंबाई, लागत और निर्माण कार्य की रूपरेखा तय की जाएगी। रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम एक आधुनिक, तेज और आरामदायक रेल सेवा है, जो दो शहरों या बड़े शहरी क्षेत्रों को कम समय में जोड़ने के लिए बनाई जाती है। इसे आम भाषा में रैपिड ट्रेन भी कहा जाता है। यह सेवा मेट्रो और सामान्य रेलवे का मिश्रित मॉडल है। इसमें यात्री लंबी दूरी भी कम समय में तय कर सकते हैं और सफर भी अधिक सुविधाजनक होता है। क्यों शुरू की जा रही है यह योजना? नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि पटना और उसके आसपास के इलाकों में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। लोगों की संख्या और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तेज और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि रैपिड ट्रेन शुरू होने से पटना के आसपास नए शहरों और टाउनशिप का विकास होगा। लोगों को नौकरी, शिक्षा और व्यापार के लिए आने-जाने में आसानी होगी। साथ ही ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। रैपिड ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज रफ्तार होगी। यह सामान्य ट्रेनों और मेट्रो ट्रेनों से काफी तेज चलेगी। इस सेवा में यात्रियों को ट्रेन के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हर 5 से 15 मिनट के बीच ट्रेन उपलब्ध होगी, जिससे यात्रा और भी आसान हो जाएगी। रैपिड ट्रेन के स्टेशनों को मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से जोड़ा जाएगा, ताकि यात्री आसानी से एक परिवहन सेवा से दूसरी सेवा में जा सकें। सरकार का मानना है कि रैपिड ट्रेन शुरू होने से सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी। इससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसके साथ ही राज्य के प्रमुख शहरों और आसपास के इलाकों का तेजी से विकास होगा। फिलहाल परियोजना की डीपीआर तैयार की जा रही है। रिपोर्ट पूरी होने के बाद निर्माण कार्य की समय-सीमा और परियोजना की कुल लागत तय की जाएगी। इसके बाद बिहार में हाई-स्पीड रैपिड ट्रेन चलाने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। Post navigation तेज प्रताप यादव के सरकारी आवास में चोरी, पीए पर 20 लाख नकद, सोना और महंगे गैजेट्स ले जाने का आरोप