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राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपने निजी सहायक पर चोरी का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर उन्होंने पटना के एक स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि उनके सरकारी आवास से लाखों रुपये नकद, सोने के आभूषण और कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान गायब हो गए हैं।

महंगे गैजेट्स गायब, तेज प्रताप के आरोपों की जांच शुरू

तेज प्रताप यादव ने अपनी शिकायत में अपने निजी सहायक मोतीलाल राय का नाम लिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके आवास से करीब 20 लाख रुपये नकद, सोने के गहने और कई कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी कर लिए गए हैं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार, 22 जून 2026 की रात करीब 11:30 बजे तेज प्रताप यादव के ड्राइवर अनिल यादव और आवास में रहने वाले विशाल ने मोतीलाल राय को एक बैग लेकर परिसर की दीवार फांदकर बाहर जाते हुए देखा था। तेज प्रताप ने इन दोनों कर्मचारियों को घटना का प्रत्यक्षदर्शी गवाह बताया है। पुलिस जल्द ही दोनों के बयान दर्ज कर मामले की सच्चाई जानने का प्रयास कर सकती है। तेज प्रताप यादव ने पुलिस को चोरी हुए सामान की विस्तृत सूची भी सौंपी है। उनके अनुसार, अलमारी से 20 लाख रुपये नकद, करीब 2 तोला सोने की चेन और एक सोने की अंगूठी गायब है। इसके अलावा कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी नहीं मिल रहे हैं। चोरी हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान में चार iPhone 17 Pro Max मोबाइल फोन, एक MacBook, एक Lenovo लैपटॉप, एक iPad, दो हार्ड डिस्क और Sony कंपनी के चार पेन ड्राइव शामिल बताए गए हैं। इन सभी सामानों की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।

पार्टी फंड के 20 लाख रुपये चोरी होने का दावा, जांच का दायरा बढ़ा

मामले को और गंभीर बनाते हुए तेज प्रताप यादव ने दावा किया है कि चोरी हुई 20 लाख रुपये की नकद राशि पार्टी फंड की रकम थी। इस दावे के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि यह रकम कहां से आई थी और इसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाना था। फिलहाल पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस मामले के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि चोरी का आरोप कितना सही है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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