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पश्चिम बंगाल में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के सेंट्रल कमेटी सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। असीम मंडल लंबे समय से झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में माओवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। उसके आत्मसमर्पण की पुष्टि झारखंड पुलिस मुख्यालय ने की है। असीम मंडल पर झारखंड और ओडिशा सरकार की ओर से कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इसमें झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार की ओर से 1.20 करोड़ रुपये का इनाम शामिल है। इतनी बड़ी इनामी राशि से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरक्षा एजेंसियों की नजर में उसकी गतिविधियां कितनी महत्वपूर्ण थीं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, असीम मंडल का नाम झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम समेत अन्य इलाकों में हुई कई मुठभेड़ों और सुरक्षा बलों से जुड़ी घटनाओं की जांच में सामने आया है। 1 मार्च 2026 को चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र के मरांगपोंगा में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान दो जवान घायल हुए थे। इनमें 209 कोबरा के एक असिस्टेंट कमांडेंट भी शामिल थे। इस घटना में भी असीम मंडल की भूमिका की जांच की जा रही है। इससे पहले 12 अप्रैल 2025 को चाईबासा के जराइकेला थाना क्षेत्र के राधापोरा में सुरक्षा बलों के साथ हुई घटना में झारखंड जगुआर का एक जवान शहीद हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड में इस मामले को भी असीम मंडल से जुड़ी गतिविधियों की जांच के दायरे में रखा गया है। 11 जनवरी 2023 को पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो थाना क्षेत्र के तुंबाहाका में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में 209 कोबरा के नौ जवान घायल हुए थे। इसके अलावा 31 मई 2020 को कराईकेला थाना क्षेत्र के जोनवा में एक सुरक्षा बल के जवान की मौत हुई थी। 11 जुलाई 2018 को पूर्वी सिंहभूम के एमजीएम थाना क्षेत्र के झाटी पहाड़ी में भी सुरक्षा बल का एक जवान शहीद हुआ था। इन घटनाओं में भी असीम मंडल की कथित भूमिका को लेकर पुलिस की जांच का उल्लेख किया गया है।

पुलिस के अनुसार, असीम मंडल पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर का रहने वाला है। वह लंबे समय से झारखंड-बंगाल सीमा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। संगठन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है और वह भाकपा (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य रहा है। सीमा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। अब पश्चिम बंगाल में उसके आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियों को माओवादी संगठन से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद है। झारखंड पुलिस उसके खिलाफ दर्ज मामलों, संगठन में उसकी भूमिका और सीमावर्ती इलाकों में उसकी गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटा सकती है। सुरक्षा एजेंसियां उसके आत्मसमर्पण के बाद माओवादी संगठन के मौजूदा नेटवर्क, संपर्कों और झारखंड-बंगाल सीमा क्षेत्र में सक्रिय लोगों के बारे में भी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकती हैं। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में माओवादी गतिविधियों से निपटने के लिए तीनों राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा है। असीम मंडल से पूछताछ के आधार पर इन इलाकों में संगठन की गतिविधियों और नेटवर्क को लेकर आगे की जांच को दिशा मिल सकती है।

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