गुरुवार की शाम तक सब कुछ सामान्य था। चमोली की पहाड़ियों के बीच निर्माणाधीन सुरंग में मजदूर रोज की तरह अपने काम में जुटे थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि कुछ ही पल बाद यही सुरंग उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच की जंग बन जाएगी। शाम करीब सात बजे अचानक सुरंग के अंदर तेज आवाज गूंजी। करीब 150 मीटर दूर से मलबा, पानी और बड़े-बड़े पत्थर तेजी से सुरंग के भीतर आने लगे। देखते ही देखते रास्ते बंद हो गए। मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कोई मलबे के धक्के से दूर जा गिरा तो कोई उसी मलबे में फंस गया। चारों तरफ अंधेरा था… सांस लेने के लिए हवा कम पड़ रही थी… और हर तरफ सिर्फ एक आवाज सुनाई दे रही थी – “बचाओ… बचाओ…” सुरंग के अंदर ऑक्सीजन का स्तर गिरता जा रहा था। कुछ मजदूर मलबे के बीच आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पानी और पत्थरों ने रास्ता रोक दिया था। बाहर उनके साथी और बचावकर्मी जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में जुटे थे। झारखंड के घरों में भी पहुंची दर्द की खबर, रातभर चलता रहा जिंदगी बचाने का अभियान इस हादसे ने झारखंड के कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वालों में झारखंड के दो मजदूर भी शामिल हैं। जो लोग रोजी-रोटी कमाने घर से हजारों किलोमीटर दूर गए थे, उनके लौटने का इंतजार कर रहे परिवारों को अब अपनों की मौत की खबर सुननी पड़ रही है। घायलों में भी झारखंड के कई मजदूर शामिल हैं। निस्तर भिंगरा, विनोद रावना, दीना बेगरा और खेला राम बिसरा समेत कई मजदूर घायल हुए हैं। उन्हें सुरंग से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। सोचिए उन परिवारों पर क्या बीत रही होगी, जिनके लिए फोन की घंटी उम्मीद थी… लेकिन दूसरी तरफ से हादसे की खबर आई। किसी मां को अपने बेटे की चिंता है, किसी पत्नी को अपने पति का इंतजार है और किसी बच्चे की आंखें अपने पिता को खोज रही हैं। हादसे के बाद रातभर सुरंग के बाहर बचाव अभियान चलता रहा। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें मलबे के बीच जिंदगी तलाशती रहीं। कभी मशीनों की आवाज सुनाई देती, कभी बचावकर्मी मलबा हटाते नजर आते। हर बार उम्मीद रहती कि शायद अंदर से कोई मजदूर जिंदा बाहर आ जाए। अब तक 21 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। इनमें सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 घायल मजदूर अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। तीन लोगों की तलाश अभी भी जारी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के CM से की बात हादसे की खबर मिलते ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी सक्रिय हुए। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। खास तौर पर झारखंड के मजदूरों की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली गई। हेल्पलाइन भी जारी की गई है, ताकि मजदूरों के परिवारों को सही जानकारी मिल सके और जरूरत पड़ने पर मदद पहुंचाई जा सके। चमोली की उस सुरंग में अभी भी सिर्फ मलबा नहीं है… वहां कुछ परिवारों की आखिरी उम्मीद भी दबी हुई है। बाहर खड़े बचावकर्मियों की नजर हर हलचल पर है। मशीनें लगातार मलबा हटा रही हैं। अंदर जाने की हर कोशिश के साथ एक ही उम्मीद है-शायद कोई जिंदगी अभी भी सांस ले रही हो। लेकिन इस हादसे ने एक बड़ा सवाल भी छोड़ दिया है – अगर सुरंग में दो दिनों से मलबा गिर रहा था, तो क्या समय रहते मजदूरों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए थे? इस सवाल का जवाब जांच के बाद मिलेगा। फिलहाल जरूरत है कि सुरंग में फंसी हर जिंदगी को सुरक्षित बाहर निकाला जाए और झारखंड के उन परिवारों तक हर सही जानकारी पहुंचाई जाए, जो हजारों किलोमीटर दूर बैठकर अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। Post navigation खनिज अधिकारों के मुद्दे पर हेमंत सोरेन का केंद्र पर हमला, बोले- झारखंड ऐसा आंदोलन करेगा जिसे पूरा देश देखेगा