झारखंड पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे और एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा को धनबाद से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथ पांच अन्य लोगों को भी पुलिस ने पकड़ा है। गिरफ्तार लोगों में तीन नक्सली और दो ग्रामीण शामिल हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन अत्याधुनिक AK-47 राइफलें भी बरामद की हैं। गुप्त सूचना पर चला विशेष अभियान जानकारी के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ नक्सली धनबाद के रास्ते जंगल की ओर जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाया। अभियान के दौरान एक पिकअप वाहन को रोका गया, जिसमें सवार नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार लोगों में मिसिर बेसरा, मोछू उर्फ तुंबा मांझी और गौरव उर्फ बीरेंद्र हांसदा शामिल हैं। इसके अलावा दो ग्रामीणों को भी गिरफ्तार किया गया है, जो नक्सलियों को सुरक्षित जंगल तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे। पुलिस ने जिस पिकअप वाहन से नक्सलियों को पकड़ा, उसकी तलाशी लेने पर तीन AK-47 राइफलें बरामद हुईं। यह बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी और हथियार बरामद होने की पुष्टि की है। कौन है मिसिर बेसरा? दशकों तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए बना रहा बड़ी चुनौती मिसिर बेसरा पिछले कई दशकों से माओवादी संगठन का बड़ा नेता माना जाता रहा है। उस पर झारखंड समेत कई राज्यों में नक्सली गतिविधियों, सुरक्षाबलों पर हमले, हत्या, लेवी वसूली और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप हैं। उसकी गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस उससे और उसके साथियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में माओवादी संगठन के नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई और अन्य गतिविधियों से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मिसिर बेसरा की उम्र करीब 65 वर्ष है। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनाडीह गांव का रहने वाला है। मिसिर बेसरा पढ़ा-लिखा है और ग्रेजुएट बताया जाता है। वह हिंदी, संथाली और हो भाषा बोलता है। पुलिस के अनुसार मिसिर बेसरा छात्र जीवन में तत्कालीन एमसीसी के नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के संपर्क में आया। उनकी विचारधारा से प्रभावित होकर उसने संगठन की बैठकों में हिस्सा लेना शुरू किया। वर्ष 1985 में सिंदरी में हुए सम्मेलन में उसने वालंटियर के रूप में काम किया और 1986 में एमसीसी का प्राथमिक सदस्य बन गया। इसके बाद वह लगातार संगठन में आगे बढ़ता गया। 1992 में झारखंड लौटकर उसने रांची और आसपास के इलाकों में संगठन का विस्तार किया। वर्ष 1997 में दक्षिणी छोटानागपुर कमेटी और 2000 में झारखंड रीजनल कमेटी के गठन में उसकी अहम भूमिका रही। 2003 में उसे केंद्रीय समिति का सदस्य बनाया गया। माओवादी संगठन का शीर्ष नेता बना, 140 से ज्यादा मामले दर्ज साल 2004 में एमसीसी और पीपुल्स वार ग्रुप के विलय के बाद बने भाकपा (माओवादी) में मिसिर बेसरा शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा बन गया। पुलिस के अनुसार वह लंबे समय तक संगठन की रणनीति तैयार करने वाले नेताओं में शामिल रहा और कोल्हान तथा सारंडा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी दस्तों का संचालन करता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक माओवादी संगठन के लिए लेवी वसूली आय का सबसे बड़ा स्रोत था। खासकर सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्य करने वाले ठेकेदारों से लेवी वसूलने में मिसिर बेसरा की अहम भूमिका रहती थी। वह संगठन के आर्थिक तंत्र को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं में गिना जाता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मिसिर बेसरा के खिलाफ 140 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या की साजिश, पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमला, विस्फोटक अधिनियम, आर्म्स एक्ट, यूएपीए, आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और माओवादी गतिविधियों से जुड़े कई गंभीर मामले शामिल हैं। उसके खिलाफ झारखंड के गोइलकेरा, टोंटो, छोटानागरा, जराईकेला, मनोहरपुर, सोनुवा सहित कई थाना क्षेत्रों में मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार नक्सलियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। उम्मीद है कि इस पूछताछ से माओवादी संगठन के नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति, वित्तीय स्रोतों और अन्य सक्रिय सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसलिए मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। Post navigation ड्राइविंग लाइसेंस में नहीं होगी अनावश्यक देरी, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश मंगलवार रात लापता, बुधवार सुबह मिली लाश… रामगढ़ में सनसनीखेज हत्या