सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को साहिल और मुस्कान को दोषी करार दिया। फैसला सुनाए जाने के दौरान सौरभ की मां रेनू, भाई राहुल उर्फ बबलू और बुआ अदालत में मौजूद थीं। वहीं, मुस्कान और साहिल के परिवार की ओर से कोई अदालत नहीं पहुंचा। दोनों को दोषी करार दिए जाने के बाद सौरभ के परिजन भावुक हो गए। परिवार को उम्मीद थी कि बुधवार को दोषी ठहराए जाने के साथ ही दोनों को सजा भी सुना दी जाएगी, लेकिन अब सजा पर फैसला 14 अक्टूबर को होगा। परिवार ने की फांसी की मांग, दोषी करार होने के बाद रोने लगे साहिल और मुस्कान सौरभ के भाई राहुल उर्फ बबलू ने कहा कि परिवार चाहता है कि दोनों दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। उनका कहना था कि जिस तरह से उनके भाई की हत्या की गई, उसके लिए इससे कम सजा नहीं होनी चाहिए। सौरभ की मां रेनू ने भी कहा कि वह सुबह इसी उम्मीद के साथ अदालत पहुंची थीं कि बुधवार को दोनों को सजा सुना दी जाएगी। उन्होंने कहा कि परिवार को अदालत पर भरोसा है और वह अपने बेटे के लिए न्याय चाहता है। रेनू ने यह भी कहा कि अगर बच्ची का हवाला देकर सजा कम कराने की कोशिश की गई तो परिवार हाईकोर्ट का रुख करेगा। उन्होंने कहा कि बेटे को न्याय दिलाने के लिए परिवार आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा। अदालत के फैसले की जानकारी मिलने के बाद जिला कारागार में बंद साहिल और मुस्कान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए। दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों भावुक होकर रोने लगे। इसके बाद जेल प्रशासन ने दोनों को उनकी बैरक में भेज दिया। जेल अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार को दोनों की काउंसलिंग कराई जाएगी। जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के अनुसार, मुस्कान अपनी बेटी को लेकर काफी भावुक और परेशान नजर आई। बताया गया कि बुधवार को सजा सुनाए जाने की उम्मीद में उसने पूजा की और सुंदरकांड का पाठ भी किया था। दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों ने शाम को सिर्फ एक-एक रोटी खाई। मारपीट की आशंका जताकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की मांग साहिल और मुस्कान ने मंगलवार को जिला जज की अदालत में एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें दोनों ने आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी के बाद रिमांड के दौरान कचहरी में कुछ अधिवक्ताओं ने उनके साथ मारपीट की थी। दोनों ने अदालत में दोबारा मारपीट होने की आशंका जताते हुए सजा की सुनवाई भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराने की मांग की थी। अदालत ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसी वजह से बुधवार को दोनों की पेशी अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। Post navigation पुष्कर महतो की अगुवाई में झारखंड बंद का असर, सड़क पर लेटकर जताया विरोध; 15 नवंबर से आमरण अनशन का ऐलान