पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी अब पश्चिम बंगाल के नये मुख्यमंत्री बनेंगे। कोलकाता में भाजपा विधायक दल की अहम बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लगी। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद रहे। बैठक में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सौमिक भट्टाचार्य ने शुभेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने एकमत से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि अब पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में चलेगी। इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 293 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर लंबे समय तक सत्ता में रही टीएमसीको बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव को पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया और भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला। अब भाजपा की ओर से शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। तीन दशक के राजनीतिक संघर्ष के बाद शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के नये मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर काफी लंबा और संघर्षों से भरा रहा है। उनका जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में हुआ था। वे एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता सिसिर अधिकारी देश की राजनीति में बड़ा नाम रहे हैं और केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। राजनीति उन्हें परिवार से विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान खुद बनायी। शुभेंदु अधिकारी ने राजनीति की शुरुआत 1995 में कांग्रेस से की थी। उसी साल वे कांथी नगर पालिका के पार्षद चुने गये थे। इसके बाद उन्होंने लगातार राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की। करीब तीन दशक के लंबे राजनीतिक सफर के बाद अब वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी के परिवार का राजनीति में बड़ा प्रभाव माना जाता है। उनके भाई दिब्येंदु अधिकारी तामलुक से सांसद और विधायक रह चुके हैं, जबकि दूसरे भाई सौमेंद्र अधिकारी कांथी नगर पालिका के अध्यक्ष रहने के साथ सांसद भी हैं। हालांकि शुभेंदु अधिकारी ने हमेशा अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाये रखी। वे अविवाहित हैं और पूरी तरह राजनीति तथा सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनकी मां गायत्री अधिकारी का भी सामाजिक जीवन में खास योगदान माना जाता है। नंदीग्राम आंदोलन ने बदली शुभेंदु अधिकारी की राजनीति, मिली बड़ी पहचान शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साल 2007 में आया। उस समय पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन शुरू हुआ था। उस समय राज्य में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा था। शुभेंदु अधिकारी आंदोलन का बड़ा चेहरा बनकर उभरे। इसी आंदोलन की वजह से वामपंथी सरकार की पकड़ कमजोर हुई और बाद में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आयी। इस आंदोलन ने शुभेंदु अधिकारी को बंगाल की राजनीति में बेहद मजबूत नेता बना दिया और उन्हें “मेदिनीपुर का बादशाह” तक कहा जाने लगा। नंदीग्राम आंदोलन के बाद शुभेंदु अधिकारी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। साल 2009 में वे तामलुक लोकसभा सीट से सांसद चुने गये। उन्होंने उस चुनाव में वामपंथी नेता लक्ष्मण सेठ को बड़े अंतर से हराया था। इसके बाद 2014 में भी वे दोबारा सांसद बने। तृणमूल कांग्रेस में उनका कद लगातार बढ़ता गया। पार्टी के अंदर उन्हें ममता बनर्जी के बाद सबसे बड़े नेता के रूप में देखा जाने लगा था। कई लोग मानते थे कि भविष्य में वे तृणमूल कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा बन सकते हैं। टीएमसी छोड़ भाजपा में आये शुभेंदु अधिकारी, अब संभालेंगे बंगाल की सत्ता लेकिन साल 2020 में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। यह फैसला पूरे राज्य की राजनीति में बड़ी हलचल का कारण बना। भाजपा ने उन्हें तुरंत बड़ा चेहरा बनाया। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम से ममता बनर्जी के खिलाफ मैदान में उतारा। उस चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश को चौंका दिया। यही जीत उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है। इसके बाद वे 2021 से 2026 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे और भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे के रूप में उभरे। 2026 के चुनाव में भाजपा ने उन्हें भवानीपुर सीट से भी उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने फिर ममता बनर्जी को हराया। लगातार दो बार ममता बनर्जी को हराने के बाद उनकी राजनीतिक ताकत और बढ़ गयी। इसी वजह से भाजपा ने अब उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि भाजपा ने बंगाल में संगठन को मजबूत करने और राज्य में स्थायी राजनीतिक पकड़ बनाने के लिए शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताया है। अब शनिवार 9 मई को शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कोलकाता में होने वाले इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। भाजपा के लिए यह केवल सरकार गठन नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में एक नये राजनीतिक दौर की शुरुआत मानी जा रही है। Post navigation बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद सीएम चेहरे पर मंथन तेज, आज फैसला संभव बंगाल में खिला कमल, शुभेंदु अधिकारी बने मुख्यमंत्री, मोदी-शाह रहे मौजूद