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झारखंड अलग राज्य के निर्माण में योगदान देने वाले सभी आंदोलनकारियों को समान सम्मान और पेंशन मिलनी चाहिए। इसके लिए जेल जाने की शर्त नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी आंदोलनकारियों को बिना किसी भेदभाव के सम्मान पेंशन दें और इसका श्रेय भी लें। यह मांग झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने की। वे बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित करमा सिंगपुर पंचायत भवन में आयोजित मोर्चा की बैठक को संबोधित कर रहे थे। पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड अलग राज्य का आंदोलन किसी एक व्यक्ति या संगठन का संघर्ष नहीं था। इसमें हजारों लोगों ने अपनी भूमिका निभाई थी। कई आंदोलनकारी जेल गए, जबकि कई लोगों ने जेल गए बिना आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे में केवल जेल जाने वाले लोगों को ही आंदोलनकारी मानना उचित नहीं है। सरकार को सभी आंदोलनकारियों के योगदान का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को जाति, धर्म और राजनीतिक दल के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस मामले में पहल करते हुए सभी आंदोलनकारियों को एक समान पेंशन और सम्मान देना चाहिए।

पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों की लड़ाई केवल पेंशन तक सीमित नहीं है। उन्हें समाज में सम्मान, अलग पहचान और उनके बच्चों के लिए रोजगार की व्यवस्था भी मिलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 100 प्रतिशत अधिकारों की गारंटी दी जाए। साथ ही सम्मान पेंशन के लिए जेल जाने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। उन्होंने सरकार से अपील की कि 15 नवंबर 2026 को राज्य स्थापना दिवस और धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 151वीं जयंती से पहले सभी मांगों पर निर्णय लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया तो 15 नवंबर को उलगुलान के जरिए आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलनकारी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि इस बार लड़ाई आर-पार की होगी।

बैठक का संचालन कर रहे मोर्चा के उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने कहा कि आंदोलनकारियों को अपने सम्मान और पहचान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को उनका उचित हक दिलाने के लिए आंदोलन तेज करना जरूरी है। सभी लोगों को एकजुट होकर 15 नवंबर के उलगुलान को सफल बनाना चाहिए, ताकि झारखंड के महापुरुषों के सपनों को साकार किया जा सके। बैठक की अध्यक्षता रामगढ़ जिला अध्यक्ष कार्तिक महथा ने की। बैद्यनाथ महतो ने स्वागत भाषण दिया, जबकि विष्णु चरण महतो ने बैठक का संचालन किया। इस अवसर पर झारखंड आंदोलनकारी वासिद अंसारी, जगन्नाथ महतो, आलोक कुमार गोस्वामी, मनीष कुमार, अनवर अंसारी, बिंदेश्वर माझी, अशोक कुमार सिंह, आलोक कुमार पांडेय, राज किशोर महतो, फागु महतो, शुक्रदेव महतो, निरंजन महतो, रामनारायण महतो, राजेश्वर महतो, वीरेंद्र कुमार महतो, हीरालाल स्वर्णकार, भूषण महतो, भागीरथ महतो, जय नंदन महतो, अर्जुन महतो, कैलाश महतो, संतोष महतो, सुदामा महतो, मुरलीधर महतो, लक्ष्मी महतो, आनंद साहू, ओमप्रकाश, रामकिंकर महतो, झगरू महतो, शिवनंदन महतो, लालमोहन महतो, गोविंद महतो, भानु कालिंदी, जानकी महतो, सिद्धेश्वर महतो, दल्लू करमाली, कृष्ण महतो, रमेश वर्मा, बैद्यनाथ महतो, संतोष कुमार महतो, सुरेंद्रनाथ महतो, निमाई चंद्र महतो, धर्मनाथ महतो, रामदेव प्रसाद महतो और दिनेश हजाम सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित थे।

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