पहले वाहन मालिकों का भरोसा जीतते थे, फिर फर्जी कागजात बनाकर स्कॉर्पियो और फॉर्च्यूनर को 3 से 5 लाख रुपये में रख देते थे गिरवी राजधानी में लग्जरी गाड़ियों को किराये पर लेकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए गिरवी रखने और मोटी रकम वसूलने वाले एक संगठित ठगी गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य वाहन मालिकों का भरोसा जीतकर उनकी महंगी गाड़ियां हासिल करते थे और फिर जाली कागजात तैयार कर उन्हें दूसरे लोगों के पास गिरवी रख देते थे। इस मामले में ओरमांझी थाना पुलिस ने एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क रांची के अलावा दूसरे जिलों और राज्यों तक फैला हुआ था। गिरफ्तार आरोपियों में ज्योति कुमारी, विश्वजीत कुमार और मनोज कुमार शामिल हैं। पुलिस की जांच में ज्योति कुमारी को गिरोह की मुख्य सूत्रधार बताया गया है। वह वाहन मालिकों और ट्रैवल एजेंसियों से संपर्क कर किराये पर गाड़ियां लेने का काम करती थी। वहीं, विश्वजीत कुमार रातू रोड स्थित शुभ यात्रा ट्रैवल्स का संचालक है। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ कांके और ओरमांझी थानों में हत्या और आर्म्स एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। तीसरा आरोपी मनोज कुमार गिरोह के लिए एजेंट के रूप में काम करता था। वह गाड़ियों को गिरवी रखने के लिए लोगों और जगहों की तलाश करता था। पहले किराया देकर जीतते थे भरोसा, फिर करते थे ठगी पुलिस की पड़ताल में गिरोह के ठगी करने का तरीका भी सामने आया है। गिरोह के सदस्य सबसे पहले लग्जरी गाड़ियों के मालिकों या ट्रैवल एजेंसियों से संपर्क करते थे। वे स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर और बोलेरो जैसी महंगी गाड़ियों को किराये पर लेते थे। शुरुआत के कुछ महीनों तक वाहन मालिकों को समय पर पूरा किराया दिया जाता था। इससे मालिकों को लगता था कि गाड़ी लेने वाले लोग भरोसेमंद हैं। धीरे-धीरे उनका विश्वास जीतने के बाद गिरोह के सदस्य ठगी की योजना को अंजाम देते थे। वाहन मालिकों का भरोसा हासिल करने के बाद गिरोह के सदस्य गाड़ियों से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कराते थे। इनमें फर्जी ओनरशिप एग्रीमेंट, एनओसी और अन्य कागजात शामिल होते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर वे गाड़ियों को अपनी बताकर दूसरे लोगों के पास गिरवी रख देते थे। पुलिस के अनुसार, रांची और आसपास के ग्रामीण इलाकों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों में भी इस तरह गाड़ियां गिरवी रखी गईं। प्रत्येक गाड़ी के बदले तीन से पांच लाख रुपये तक वसूले जाते थे। किराया मिलना बंद हुआ तो वाहन मालिकों को हुआ शक गिरोह की पोल तब खुलनी शुरू हुई, जब वाहन मालिकों को तय समय पर किराया मिलना बंद हो गया। उन्होंने ज्योति कुमारी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन लगातार बंद मिलने लगा। इससे वाहन मालिकों को संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। इसके बाद कुछ वाहन मालिकों ने अपनी गाड़ियों में लगे जीपीएस ट्रैकर की मदद से उनकी लोकेशन पता की। जांच करने पर पता चला कि गाड़ियां उन जगहों पर नहीं थीं, जहां उन्हें बताया गया था। कई गाड़ियों की लोकेशन दूसरे इलाकों और अनजान गैरेज में मिली। इसके बाद पीड़ित वाहन मालिकों ने आपस में संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी जुटाई। अंत में सभी ने ओरमांझी थाने पहुंचकर पुलिस से लिखित शिकायत की। गिरोह के दूसरे सदस्यों की तलाश में छापेमारी शिकायत मिलने के बाद ओरमांझी पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी। गुप्त सूचना और तकनीकी सेल की मदद से पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितनी गाड़ियों को किराये पर लेकर फर्जी तरीके से गिरवी रखा है और इस ठगी में कितने लोग शामिल हैं। पुलिस उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जो गिरोह के लिए जाली दस्तावेज तैयार करते थे या गिरवी रखी गई गाड़ियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में मदद करते थे। जांच का दायरा बढ़ाते हुए गिरोह के अन्य सहयोगियों और उसके अंतरजिला तथा अंतरप्रांतीय नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की जांच में ठगी के इस पूरे खेल से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। Post navigation होटल से घर लौट रहे मैनेजर की बेरहमी से हत्या, पिठोरिया चौक पर फूटा लोगों का गुस्सा