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सोचिए, सड़क पर कोई व्यक्ति कार के नीचे फंस जाए, कोई चाकू लेकर हमला करने दौड़े या कोई पैदल यात्री तेज रफ्तार कार की चपेट में आने वाला हो। ऐसी स्थिति में अगर कोई रोबोट तुरंत मदद के लिए पहुंच जाए, तो कैसा होगा? चीन की रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स (Unitree Robotics) ने अपने एक नए रोबोट के प्रमोशनल वीडियो में कुछ ऐसे ही दृश्य दिखाए हैं। वीडियो में रोबोट अपनी ताकत, फुर्ती और तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता का प्रदर्शन करता नजर आ रहा है। कंपनी ने इस रोबोट को H2-X मॉडल के तहत डिजाइन किया है और इसे ‘कुंग फू लीजेंड गार्जियन’ नाम दिया है। इंसान जैसी बनावट वाले इस रोबोट को लेकर जारी वीडियो में कई ऐसे दृश्य हैं, जो लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। हालांकि, वीडियो में दिखाया गया प्रदर्शन कंपनी का प्रचार वीडियो है। इससे यह साबित नहीं होता कि रोबोट वास्तविक परिस्थितियों में भी इसी तरह काम कर सकेगा।

वीडियो की शुरुआत में रोबोट अपनी शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करता दिखाई देता है। वह कार पर छलांग लगाता है और तेजी से हरकत करते हुए कई करतब दिखाता है। इसके बाद वीडियो में एक व्यक्ति चाकू लेकर उसकी ओर बढ़ता नजर आता है। रोबोट उस व्यक्ति का सामना करते हुए उसे रोकने की कोशिश करता है। वीडियो का सबसे खास हिस्सा उस समय दिखाई देता है, जब एक व्यक्ति कार के नीचे फंसा नजर आता है। रोबोट तुरंत वहां पहुंचता है और कार को पीछे की ओर से उठाता है। इसके बाद दूसरा व्यक्ति नीचे फंसे पुतले को बाहर निकालता है। इस दृश्य के माध्यम से कंपनी ने रोबोट की ताकत और भारी वस्तु उठाने की क्षमता का प्रदर्शन किया है। आपातकालीन परिस्थितियों में किसी वाहन को उठाना बचाव कार्य का अहम हिस्सा हो सकता है। हालांकि, वास्तविक दुर्घटना के दौरान ऐसा करने के लिए वाहन को स्थिर रखना, पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रशिक्षित बचावकर्मियों की मदद लेना जरूरी होता है।

रोबोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच ऐसे मॉडल भविष्य में सुरक्षा, आपदा राहत और जोखिम भरे कामों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। लेकिन इसके लिए उनकी ताकत के साथ-साथ खतरे को सही तरीके से पहचानने, सही निर्णय लेने और इंसानों को नुकसान से बचाने की क्षमता का परीक्षण करना जरूरी है। फिलहाल H2-X रोबोट का वीडियो कंपनी की तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन करता है। वास्तविक परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता और सुरक्षा को लेकर स्वतंत्र परीक्षण के नतीजे सामने आने के बाद ही इसकी वास्तविक क्षमता का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

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