बिशुनपुर के बनारी मिशन चौक पर आयोजित हुआ समारोह, झारखंड आंदोलनकारियों ने शोषण मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त और समतामूलक राज्य बनाने का लिया संकल्प बिशुनपुर: झारखंड आंदोलन के प्रमुख पुरोधा रहे अजीत तिग्गा की स्मृति में बिशुनपुर प्रखंड के बनारी मिशन चौक के पास उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आंदोलनकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। समारोह के दौरान अजीत तिग्गा को श्रद्धांजलि दी गई और उनके संघर्ष, योगदान तथा झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में निभाई गई भूमिका को याद किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संत जोसेफ चर्च में मिस्सा प्रार्थना के साथ हुई। इसके बाद भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने अजीत तिग्गा अमर रहें, जब तक सूरज-चांद रहेगा, अजीत तिग्गा तेरा नाम रहेगा और अजीत तिग्गा के अरमानों को मंजिल तक पहुंचाना है जैसे नारे लगाए। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण में जिन आंदोलनकारियों ने अपना जीवन संघर्ष में लगा दिया, उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नई पीढ़ी को भी उनके विचारों और संघर्षों से परिचित कराना जरूरी है। अजीत तिग्गा के सपनों को पूरा करने के लिए 15 नवंबर को उलगुलान का आह्वान कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि अजीत तिग्गा के संघर्ष और बलिदान की बुनियाद पर ही झारखंड अलग राज्य का सपना साकार हुआ। अब उनके सपनों के झारखंड को बनाने की जिम्मेदारी आंदोलनकारियों और राज्य के लोगों की है। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर 2026 को ‘उलगुलान एक क्रांति’ के माध्यम से एक नया इतिहास लिखने का संकल्प लिया गया है। पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड को शोषण मुक्त, समतामूलक और भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाना ही अजीत तिग्गा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक झारखंड के लोगों को उनका हक और अधिकार नहीं मिल जाता। उन्होंने राज्य में रोजगार और नौकरियों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि झारखंड के रोजगार और सरकारी नौकरियों पर यहां के बेटे-बेटियों का संवैधानिक अधिकार है। इस अधिकार को हासिल करने के लिए आंदोलनकारी हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। जल, जंगल, जमीन और झारखंड की पहचान की रक्षा का संकल्प मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष विदेशी महतो ने कहा कि झारखंड अलग राज्य का आंदोलन केवल अलग राज्य बनाने तक सीमित नहीं था। इसके पीछे यहां के लोगों की अस्मिता, अस्तित्व, पहचान और जल, जंगल, जमीन की रक्षा का उद्देश्य भी जुड़ा था। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर आंदोलनकारियों ने लंबा संघर्ष किया है और इस संघर्ष को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं रोजलीन तिर्की ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अब निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि सभी आंदोलनकारी एकजुट होकर 15 नवंबर 2026 को ‘उलगुलान एक क्रांति’ का आगाज करेंगे। उन्होंने आंदोलनकारियों से अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई में एकजुट रहने की अपील की। कई आंदोलनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद कार्यक्रम का संचालन दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के प्रभारी अनथन लकड़ा ने किया। समारोह में रामनंदन साहू, सोमारी देवी, प्रकाश खलखो, कोलेस्थान, मैथू लोहरा, ज्योति टोप्पो, विजय तिर्की, सुजात टोप्पो, भोला नाथ सिंह, हीरा प्रधान, छोटू अंसारी, राजदेव महतो, ललित नारायण और रतिया इंदवार सहित कई लोग मौजूद थे। सभी ने अजीत तिग्गा के संघर्ष और विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। Post navigation पिठौरिया में आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत, खुदकुशी की कोशिश की सूचना; पुलिस जांच में जुटी