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झारखंड आंदोलनकारियों के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई को तेज करने के लिए 15 नवंबर को रांची के बिरसा चौक पर ‘उलगुलान एक क्रांति’ आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा, गिरिडीह जिला की ओर से जुलूस और एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में आंदोलनकारी शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की मांग को लेकर रांची पहुंचने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की शुरुआत गिरिडीह के झंडा मैदान से जुलूस निकालकर की गई। जुलूस में शामिल आंदोलनकारी विभिन्न मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए आगे बढ़े। इसके बाद जुलूस डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन एवं पुस्तकालय परिसर पहुंचा, जहां यह सम्मेलन में बदल गया। सम्मेलन में आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि झारखंड राज्य के निर्माण में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों को राजकीय सम्मान, अलग पहचान और उचित अधिकार दिए जाएं। उनके बच्चों और आश्रितों के लिए रोजगार तथा सरकारी नौकरियों में शत-प्रतिशत अवसर सुनिश्चित किए जाएं। इसके अलावा जेल जाने की बाध्यता समाप्त कर सभी आंदोलनकारियों को समान रूप से 50-50 हजार रुपये मासिक सम्मान पेंशन देने की मांग उठाई गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को 1932 के खतियान के नाम पर झारखंड के लोगों को गुमराह करना बंद करना चाहिए। सरकार को राज्य के लोगों को उनका पूरा अधिकार और सम्मान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड में पलायन और विस्थापन बड़ी समस्या है। इसे रोकने के लिए राज्य में खनिज आधारित उद्योग-धंधे स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को अपने ही राज्य में रोजगार मिल सके। पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने अलग राज्य के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया है। ऐसे में सरकार को उनके योगदान को सम्मान की नजर से देखना चाहिए। आंदोलनकारियों को जाति और धर्म से ऊपर उठकर समान सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जो आंदोलनकारी जेल गए हैं और जो जेल नहीं गए हैं, सभी को समान रूप से 50 हजार रुपये मासिक सम्मान पेंशन दी जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की कि सभी आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन देने की पहल कर इसका श्रेय लें। पुष्कर महतो ने गिरिडीह के आंदोलनकारियों से अपने बच्चों के भविष्य, अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में रांची पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर को बिरसा चौक पर होने वाला उलगुलान आंदोलन अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और धरना-प्रदर्शन के रूप में चलेगा। आंदोलनकारियों के अधिकार मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष विदेशी महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों का सम्मान करना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। आंदोलनकारियों को सम्मान देना झारखंड के गौरव को सम्मान देने के बराबर है। उन्होंने कहा कि सरकार को झारखंड के विकास के लिए सही नीतियां बनानी चाहिए और आंदोलनकारियों को उनका हक देना चाहिए। 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की धरती पर उलगुलान एक क्रांति के माध्यम से आंदोलन की नई शुरुआत होगी। वहीं, प्रसाद बैजू ने कहा कि सरकार को संविधान के प्रावधानों के तहत स्थानीय नीति लागू करनी चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे आने की अपील की।

सम्मेलन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष नारायण राणा ने की, जबकि संचालन ओम प्रकाश मेहता ने किया। कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारी युवा मोर्चा के अध्यक्ष ललित नारायण, देवकी भारती, रघुनाथ सिंह, विनोद पांडेय, लड्डू पांडेय, सूरज प्रसाद जायसवाल, मीनू टुडू, जिदन कोल, नारायण मंडल, बुधन कोल, देवेंती भारती, हरिहर टूरी, मुजाहिद अंसारी, इम्तियाज खान, विमल टोप्पो, पौलुस हंसदा, रामकृष्ण सिंह और शिवाजी मुर्मू सहित कई आंदोलनकारी मौजूद थे। सम्मेलन के अंत में आंदोलन को सफल बनाने और अधिक से अधिक आंदोलनकारियों को रांची पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

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