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सौरभ हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों को साक्ष्य मिटाने के मामले में भी दोषी माना और इसके लिए अलग से सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी। मृत्युदंड का निष्पादन उच्च न्यायालय की पुष्टि के अधीन रहेगा।

सौरभ हत्याकांड में फैसला सुनाने की तारीख पहले से ही 14 अक्टूबर तय थी। इसी वजह से जिला जज की अदालत के बाहर सुबह करीब 10 बजे से ही मीडिया की भीड़ जुटने लगी थी। सभी की नजर अदालत के फैसले पर थी। करीब 10:30 बजे जिला कारागार से मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान मुस्कान अपनी छोटी बेटी को गोद में लिए हुए अदालत के सामने पेश हुई। डीजीसी केके चौबे के अनुसार, जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों को देखकर कहा कि आज सजा के बिंदु पर सुनवाई होनी है। इसके बाद जज ने दोनों से उनकी शिक्षा के बारे में पूछा। दोनों ने खुद को स्नातक बताया। इसके बाद अदालत ने उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली, जिस पर दोनों ने खुद को स्वस्थ बताया। जब अदालत ने दोनों से पूछा कि सजा सुनाए जाने से पहले वे अपने बचाव में कुछ कहना चाहते हैं या नहीं, तो मुस्कान ने अपनी दो छोटी बेटियों का हवाला दिया। उसने कहा कि उसकी दो छोटी बेटियां हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए न्याय किया जाना चाहिए। वहीं साहिल से भी अदालत ने पूछा, लेकिन वह इस दौरान गुमसुम रहा और कोई खास बात नहीं कही। इसके बाद दोनों ने कहा कि उन्हें अदालत के न्याय पर पूरा भरोसा है।

करीब 11:15 बजे सजा के बिंदु पर अदालत में दोनों पक्षों की ओर से बहस शुरू हुई। मुस्कान और साहिल की ओर से मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता रेखा जैन ने दोनों के बचाव में अपनी दलीलें रखीं। वहीं सौरभ की ओर से शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा, यानी मृत्युदंड दिए जाने की मांग की। इसके लिए उन्होंने मामले में सामने आए साक्ष्यों और पुरानी घटनाओं का भी हवाला दिया। दोनों पक्षों की ओर से करीब सवा घंटे तक दलीलें रखी गईं। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने के लिए शाम 4 बजे का समय तय किया।

शाम करीब 4:05 बजे जिला जज अरविंद कुमार मिश्र अदालत में पहुंचे। इससे पहले ही जेल से मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट से जोड़ दिया गया था। अदालत ने दोनों को संबोधित करते हुए कहा कि निर्णय की अंतिम घड़ी आ गई है। इसके बाद अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के साथ धारा 3(5) के तहत दोनों को हत्या का दोषी माना और मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक को पांच महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मृत्युदंड का निष्पादन माननीय उच्च न्यायालय की पुष्टि के अधीन रहेगा। हत्या के अलावा अदालत ने साक्ष्य मिटाने के मामले में भी दोनों को दोषी पाया। बीएनएस की धारा 238(ए) के तहत मुस्कान और साहिल को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इस मामले में दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर प्रत्येक को एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस तरह अदालत के फैसले में हत्या के मामले में मृत्युदंड और साक्ष्य मिटाने के मामले में सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा शामिल है। करीब सवा चार बजे जैसे ही अदालत ने फैसला सुनाया, कोर्ट रूम का माहौल बदल गया। वहां मौजूद अधिवक्ताओं ने तालियां बजाईं और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। फैसला सुनाने के बाद जिला जज अदालत से चले गए। इसके बाद अधिवक्ताओं ने कोर्ट रूम के बाहर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और फैसले पर खुशी जाहिर की। अधिवक्ताओं ने इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह निर्णय एक मिसाल बनेगा।

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