झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को आयोजित झारखंड बंद का राज्य के कई जिलों में व्यापक असर देखने को मिला। आंदोलनकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। इस दौरान कई स्थानों पर सड़क जाम कर वाहनों का परिचालन रोका गया। चतरा और बोकारो में बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिन्हें कुछ समय बाद छोड़ दिया गया। आंदोलन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जेल जाने की बाध्यता समाप्त करना, सभी झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन के रूप में 50-50 हजार रुपये प्रतिमाह देना, उनके बच्चों और आश्रितों को नौकरी में सीधी नियुक्ति का अधिकार देना, खनिज संपदा पर 26 प्रतिशत रॉयल्टी का अधिकार और जल, जंगल, जमीन की रक्षा शामिल है। बंद के दौरान आंदोलनकारी हाथों में तीर-धनुष और अन्य पारंपरिक हथियार तथा लाल-हरा झंडा लेकर सड़कों पर नजर आए। कई जगह आंदोलनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से अपनी मांगें जल्द पूरी करने की मांग की। सड़क पर लेटे पुष्कर महतो , आंदोलनकारियों ने लगाया जाम; 15 नवंबर से आमरण अनशन का ऐलान रांची के अल्बर्ट एक्का चौक के पास आंदोलनकारियों ने पारंपरिक हथियारों के साथ प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक पुष्कर महतो सड़क के बीच लेट गए। आंदोलनकारियों ने इस दौरान पुलिस का दमन नहीं चलेगा जैसे नारे भी लगाए। आंदोलन में अंथन लकड़ा, दिवाकर साहू, करमा तिग्गा, अमर भेंगरा, शीला कच्छप, रंजनी कंडुलना, मार्गरेट तिग्गा, बेला बलवंती एक्का, रेखा देवी, सिमोन तिग्गा, शैलेंद्र शर्मा और संजू उरांव समेत कई लोग शामिल रहे। पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, किसान सभा के नेता केडी सिंह और सीपीआई के जिला सचिव अजय सिंह समेत अन्य लोगों ने भी आंदोलनकारियों का समर्थन किया। पुष्कर महतो ने कहा कि अगर झारखंड आंदोलनकारियों को जल्द सम्मान, न्याय और समाज में स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार नहीं मिला तो 15 नवंबर 2026 से बिरसा चौक के पास अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यभर के आंदोलनकारी बड़ी संख्या में वहां पहुंचकर तंबू लगाकर आंदोलन करेंगे और अपने बच्चों तथा आश्रितों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। सड़कों पर आंदोलनकारी, हाईवे पर वाहनों की कतार; झारखंड बंद से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित लोहरदगा में शंख मोड़ के पास जिला अध्यक्ष रामनंदन साहू और बुद्धेश्वर उरांव के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने बड़ी संख्या में वाहनों को रोककर बंद को सफल बनाने का प्रयास किया। वहीं पलामू जिले के रेडमा चौक पर सड़क जाम किए जाने से बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले वाहनों का परिचालन प्रभावित हुआ। शहर में भी यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। आंदोलन के कारण प्रशासन को परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। यहां प्रमंडल अध्यक्ष भारदुल भुइयां, विलंगना किंडो, मुरारी पांडेय, प्रदीप सिन्हा, असलम अंसारी, राजू प्रजापति और मीना सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे। बोकारो जिले में जैना मोड़ चास स्थित आईटीआई मोड़ पर आंदोलनकारियों ने सड़क जाम कर दी। इसके कारण शहर के कई हिस्सों में छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतार लग गई। प्रदेश अध्यक्ष विदेशी महतो, जिला अध्यक्ष राजदेव महथा, खगेंद्र नाथ वर्मा, भीम मांझी, करमचंद मांझी, ठाकुर महतो, हबूलाल गोराई, ललित नारायण समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी और महिलाएं मौजूद रहीं। पुलिस ने यहां कई आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। दुमका में फूलो-झानो चौक पर आंदोलनकारियों ने सड़क जाम कर विरोध जताया। आंदोलनकारी पारंपरिक हथियारों और पारंपरिक परिधान के साथ पहुंचे थे। इस दौरान डुगडुगी बजाकर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया। मीनू टुडू, जीतन कोल, बुधन हंसदा और सोनाराम मोलिता मरांडी समेत कई आंदोलनकारी मौके पर मौजूद रहे। रामगढ़ जिले में नया मोड़ और गोल स्थित डीवीसी मोड़ पर आंदोलनकारियों ने सड़क जाम कर दिया। सुबह से जाम में बैठे आंदोलनकारियों ने चूड़ा और गुड़ खाकर अपना समय बिताया। कार्तिक महथा, सूरज प्रसाद जायसवाल, देवी प्रसाद, अमूल्य उपाध्याय, लालधन महतो, हसनैन अंसारी और सविता देवी समेत अन्य लोग आंदोलन में शामिल रहे। गुमला जिले में बिशुनपुर के पास सड़क जाम कर बड़ी संख्या में बॉक्साइट ढुलाई वाले वाहनों को घंटों रोका गया। वहीं छत्तीसगढ़ सीमा के माझाटोली के पास भी मुख्य मार्ग को जाम किया गया, जिससे झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच छोटे-बड़े वाहनों का परिचालन प्रभावित रहा। रोजलीन तिर्की, रंजीत टोप्पो, प्रकाश खलखो, खोरस केरकेट्टा, विजय उरांव, इसाक टोप्पो, हीरा प्रधान, भोलानाथ सिंह और रतिया इदवार समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी और महिलाएं मौजूद रहीं। सिसई, भरनो, चैनपुर, डुमरी, बसिया और पालकोट में भी आंदोलनकारियों ने सड़क पर उतरकर बंद का समर्थन किया। हजारीबाग जिले में भी बंद का असर काफी व्यापक रहा। गोविंद माली, महेंद्र प्रसाद मेहता, बसंत यादव, सबूर मेहता, परमेश्वर महतो और जासो देवी समेत सैकड़ों आंदोलनकारी सड़कों पर रहे। सड़क जाम के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। चतरा जिले में आंदोलनकारियों ने केसरी चौक को जाम कर दिया। यहां बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हिरासत में लिया गया। कुछ समय तक थाने में रखने के बाद सभी को छोड़ दिया गया। रामचंद्र राणा, केके वर्मा और जयकुमार मेहता समेत कई आंदोलनकारी मौके पर मौजूद थे। पूर्वी सिंहभूम जिले में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला। बंगाल सीमा से जुड़े इलाकों में सड़क जाम के कारण बड़ी संख्या में वाहन घंटों फंसे रहे। शहरी क्षेत्रों में भी कई जगह बंद का प्रभाव रहा। विश्वजीत प्रमाणिक, मिहिर तिवारी, शिबू काली, मीनाई मैती और शरत महतो समेत अन्य आंदोलनकारी मौजूद रहे। आंदोलनकारियों के मुताबिक धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में भी बंद का असर देखने को मिला। कई जगह कोयला, अभ्रक, लौह अयस्क, बॉक्साइट, बालू और गिट्टी की ढुलाई प्रभावित हुई। सड़क जाम के कारण मालवाहक वाहनों के साथ आम यातायात पर भी असर पड़ा। 26 साल बाद भी मांगें लंबित होने का आरोप पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड राज्य बने 26 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आंदोलनकारियों की कई मांगें अब भी लंबित हैं। उनके मुताबिक सरकार के संकल्प और आश्वासनों पर अपेक्षित अमल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा अपने बच्चों और आश्रितों के अधिकार, आंदोलनकारियों के सम्मान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा, किसानों के विस्थापन और पलायन को रोकने तथा मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। उन्होंने खनिज संपदा पर 26 प्रतिशत रॉयल्टी के अधिकार और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम से गजट अधिसूचना जारी कर उन्हें झारखंड आंदोलनकारियों के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि मशाल जुलूस और झारखंड बंद के माध्यम से सरकार का ध्यान इन मांगों की ओर आकर्षित किया गया है। मोर्चा की ओर से सरकार से सभी झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन और नौकरी की सुविधा देने, आंदोलनकारियों के बच्चों को रोजगार उपलब्ध कराने, किसानों की ऋण माफी तथा विस्थापितों को मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास देने की मांग की गई है। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार जल्द उनकी मांगों पर निर्णय ले, ताकि उन्हें आगे अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और बड़े आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े। Post navigation कमरे से निकले, छत पर पहुंचे और फिर… संत प्रेमानंद के शिष्य की मौत ने बढ़ाई पुलिस की चिंता