G-6J2VDTQNQL

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स समिट 2026 की आधिकारिक शुरुआत की। दो दिन तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेता शामिल हुए। पीएम मोदी ने सम्मेलन में पहुंचे नेताओं का स्वागत किया। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी शामिल रहे। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य आधार लोगों को केंद्र में रखना और मानवता को प्राथमिकता देना रहा है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और टिकाऊ विकास को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है।

पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने गठन के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए दौर की शुरुआत मानी जाती है। इसी तरह ब्रिक्स भी अब अपने विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। पिछले 20 वर्षों में संगठन ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी देश एक-दूसरे के नजरिए का सम्मान करते हैं और आपसी सहमति से आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। पीएम मोदी ने वैश्विक दक्षिण यानी विकासशील देशों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों का सामना करने में ग्लोबल साउथ सबसे आगे रहता है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अभी भी सीमित है। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब विशेषाधिकार पर आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर साझेदारी का मंच तैयार करना होगा, जहां हर देश की आवाज सुनी जाए और हर सदस्य की भागीदारी सुनिश्चित हो।प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए ब्रिक्स देशों के सामने 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों पर मिलकर काम किया जाना चाहिए और अगले शिखर सम्मेलन तक इन्हें ‘ब्रिक्स सुधार रोडमैप’ का रूप दिया जा सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि इस रोडमैप को तैयार करते समय तीन प्रमुख बातों पर विशेष ध्यान देना होगा। इनमें प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया शामिल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं में सभी देशों को उनकी भूमिका और योगदान के अनुरूप उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर बातचीत एक निश्चित समय सीमा और स्पष्ट परिणामों से जुड़ी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार की भी बात कही। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में मतदान की शक्ति, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को तय करने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए। अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित ब्रिक्स समिट का संदेश स्पष्ट होना चाहिए। अगर दुनिया का भविष्य साझा है, तो उसे बनाने का अधिकार भी सभी का साझा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आवाज से प्रभाव और विशेषाधिकार से साझेदारी की ओर बढ़ना ही ब्रिक्स 2026 का संकल्प होना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *