झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और देरी के विरोध में चल रहे छात्रों के आंदोलन के दौरान शुक्रवार को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हंगामा हो गया। आंदोलन स्थल पर छात्रों और एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की होने से कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया। हालांकि, बाद में स्थिति पर काबू पा लिया गया और आंदोलन जारी रहा। जानकारी के अनुसार, जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जांच की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आंदोलन स्थल पर पहुंचे राजनीतिक कार्यकर्ता, मंच पर हुआ विवाद शुक्रवार को आंदोलन स्थल पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो के समर्थक और कुछ कार्यकर्ता पहुंचे। इसके बाद आंदोलन में मौजूद कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया। छात्रों का कहना था कि उनका आंदोलन पूरी तरह छात्र हितों से जुड़ा है और वे इसे किसी भी राजनीतिक दल या नेता से जोड़ना नहीं चाहते। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही राजनीतिक कार्यकर्ता मंच पर पहुंचे, कुछ छात्रों ने उन्हें मंच से नीचे उतरने के लिए कहा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद अन्य छात्रों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। मौके पर मौजूद छात्रों के अनुसार, आंदोलन का नेतृत्व और उसका श्रेय किसे मिले, इसे लेकर भी अलग-अलग छात्र समूहों के बीच मतभेद सामने आए। कुछ छात्रों का आरोप था कि नए छात्र संगठन और राजनीतिक लोग पहले से चल रहे आंदोलन का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना था कि वे केवल छात्रों की मांगों का समर्थन करने पहुंचे थे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं है। उनका उद्देश्य केवल भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और छात्रों को न्याय दिलाना है। छात्रों ने कहा कि वे नहीं चाहते कि उनके आंदोलन को राजनीतिक रंग दिया जाए। हंगामे के बाद भी छात्र अपने आंदोलन पर डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। Post navigation राज्यपाल संतोष गंगवार ने पूरे किए दो वर्ष, बोले- जनता का विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत