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झारखंड आंदोलनकारी और कोल समाज के वरिष्ठ नेता उमानाथ कोल का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। यह हादसा फतेहपुर डिग्री कॉलेज के पास हुआ। उनके निधन की खबर से झारखंड आंदोलनकारी और कोल समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के दुमका प्रमंडल अध्यक्ष जीतन कोल और सचिव बुधन हांसदा ने उमानाथ कोल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उमानाथ कोल ने झारखंड आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वे कोल समाज के एक बड़े नेता थे। उनके जाने से समाज और आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है। जीतन कोल ने कहा कि उमानाथ कोल का जीवन और उनके संघर्ष हमेशा लोगों को प्रेरित करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा जल्द ही एक शोक सभा आयोजित करेगा, जिसमें सभी आंदोलनकारी और समाज के लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। सरकार से मांग की गई कि मृतक के आश्रित को तत्काल 10 लाख रुपए के मुआवजा एवं एक आश्रित को तत्काल नौकरी सरकार दे।

उमानाथ कोल की मौत पर पुष्कर महतो का बड़ा बयान, स्वास्थ्य व्यवस्था को बताया जिम्मेदार

उमानाथ कोल के निधन के बाद झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आंदोलनकारी पुष्कर महतो ने आरोप लगाया कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है और कई अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि हाल ही में सदर अस्पताल में एक महिला की इलाज के अभाव में मौत हो गई थी। वहीं डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दूर-दराज के गांवों से इलाज के लिए आए कई मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा। पुष्कर महतो ने यह भी आरोप लगाया कि जब उमानाथ कोल सड़क दुर्घटना में घायल हुए, तब उन्हें समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। आंदोलनकारियों के दबाव के बाद पुलिस वाहन से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। आवश्यक इलाज में देरी होने के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। उनका आरोप है कि यदि समय पर एंबुलेंस और बेहतर इलाज मिलता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। आंदोलनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर की जाए, पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज या घायल व्यक्ति को इलाज के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े।

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