झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की मांग वाली याचिका पर झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से इस मामले में जवाब मांगा है। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। छात्र एक महीने से अधिक समय से कर रहे आंदोलन, परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और मनन मिश्रा ने अदालत के सामने मामले से जुड़ी जानकारी रखी। वकीलों ने बताया कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ झारखंड के छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना था कि छात्र एक महीने से ज्यादा समय से सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था, लेकिन झारखंड हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने कथित गड़बड़ी को देखते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया था। हालांकि, इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और अदालत ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की गई है। उनका तर्क है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच जरूरी है। CJI ने न्यायिक भर्ती को लेकर भी पूछा सवाल, सबूत सुरक्षित रखने की भी मांग सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि क्या झारखंड में न्यायिक भर्ती परीक्षाएं भी JPSC के माध्यम से आयोजित होती हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने इसका जवाब हां में दिया। इसके बाद मामले की जांच और परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। अब राज्य सरकार और JPSC को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखना होगा। याचिका में केवल CBI जांच की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि परीक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि परीक्षा से जुड़े मूल OMR शीट, अभ्यर्थियों की OMR कार्बन कॉपी, CCTV फुटेज और सर्वर ऑडिट लॉग जैसे डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित किया जाए। इसके पीछे आशंका जताई गई है कि जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो। इसलिए सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना जरूरी है। Post navigation JPSC 14वीं सिविल सेवा PT में धांधली की जांच तेज, रांची-हजारीबाग में CID की छापेमारी