झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर सरकार ने अब तक के सबसे बड़े फैसलों में से एक लिया है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों और CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। इसके साथ ही पहले से सरकारी नौकरी कर रहे 2,628 अधिकारियों और कर्मचारियों का भविष्य अधर में है। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में नौकरी कर रहे कर्मचारियों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों तक में हलचल मच गई है। जिन लोगों की नियुक्ति खत्म हुई है, उन्होंने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है और सरकार से अपना पक्ष रखने का मौका देने की मांग की है। 2,628 लोगों की नौकरी पर चला सरकार का आदेश, कर्मचारियों ने शुरू किया विरोध इस पूरे फैसले का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा है, जो JPSC और JSSC की परीक्षाएं पास करके सरकारी सेवा में शामिल हो चुके थे। सरकारी आदेश के मुताबिक JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के जरिए चयनित 342 अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई है। इनमें 63 CDPO, 54 फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और 237 महिला पर्यवेक्षिका शामिल हैं। वहीं JSSC CGL के विज्ञापन संख्या 10/2023 के जरिए सरकारी नौकरी पाने वाले 1,932 कर्मचारियों की सेवाएं भी प्रभावित हैं। हजारों परिवारों के सामने आर्थिक और भविष्य से जुड़ी चिंता खड़ी हो गई है। प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नियमों के तहत नियुक्ति हासिल की थी और कई वर्षों से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। सरकार के आदेश के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। रांची में कई कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठे हैं। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शन जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जांच की जानी चाहिए, लेकिन उसका खामियाजा उन अभ्यर्थियों को क्यों भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति हासिल की और अब तक अपनी सेवाएं दी हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनका पक्ष सुना जाए और उनकी सेवाएं समाप्त करने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। कई बड़ी भर्ती परीक्षाएं भी रद्द, 17 पुरानी भर्तियों की जांच फिर शुरू होगी सरकार ने सिर्फ नियुक्त कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की है, बल्कि गड़बड़ी के आरोपों वाली कई भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया है। इनमें संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023, CDPO भर्ती, फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती, छठी लिमिटेड डिप्टी कलेक्टर परीक्षा और JET 2024 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में नॉन-टीचिंग पदों की भर्ती, ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर, इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक लेक्चरर और मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती भी रद्द करने का फैसला लिया गया है। सिविल जज, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जैसी भर्तियां भी इस कार्रवाई के दायरे में आई हैं। सरकार ने पुराने मामलों की फाइल भी खोलने का फैसला किया है। कुल 17 पुरानी भर्तियों की जांच CID करेगी। इनमें 5वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती, सिविल जज जूनियर डिवीजन की भर्ती, सॉयल कंजर्वेशन ऑफिसर, कृषि विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर और सब डिविजनल एग्रीकल्चर ऑफिसर, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, कमर्शियल टैक्स, संयुक्त सिविल सेवा, जियोलॉजिस्ट और केमिस्ट, असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और असिस्टेंट इंजीनियर की भर्तियां शामिल हैं। संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2021 और डेंटल डॉक्टरों की नियमित भर्ती की भी जांच होगी। छह भर्तियों की प्रक्रिया पर रोक, अब परीक्षा व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव JPSC की छह अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को जांच पूरी होने तक रोक दिया गया है। इन मामलों में आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। जिन भर्तियों पर रोक लगाई गई है, उनमें फूड एनालिस्ट, डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन, प्रोजेक्ट मैनेजर, इंस्पेक्टर ऑफ फैक्टरीज, बॉयलर इंस्पेक्टर और डायरेक्टर पद की भर्ती शामिल है। सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन परीक्षाओं की प्रक्रिया में किस एजेंसी की क्या भूमिका थी और कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। सरकार ने भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की भी बात कही है। IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी में वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा किसी प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक को भी शामिल किया जाएगा। कमेटी को दो महीने के भीतर परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया पर लगातार नजर रखने के लिए विशेष विजिलेंस सेल बनाया जाएगा। इसका काम परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों और कदाचार को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना होगा। JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट से विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध करने की भी तैयारी है। Post navigation JSSC CGL कर्मचारियों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी, भारी बारिश में प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे टेंट उखड़े, छात्र लौटे घर… लेकिन आंदोलन खत्म नहीं! सरकार को 60 दिनों का अल्टीमेटम