G-6J2VDTQNQL

बिहार की ‘हर घर नल का जल’ योजना से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने मेसर्स एनएस इंटरप्राइजेज को बड़ी राहत दी है। अदालत ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से कंपनी के 57 अनुबंध रद्द करने और उसे ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई को रद्द कर दिया है। साथ ही विभाग को कंपनी की 1 करोड़ 85 लाख 98 हजार 200 रुपये की बकाया राशि ब्याज सहित दो महीने के भीतर चुकाने का आदेश दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस गिरिजेश कुमार की एकल पीठ ने की। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना उसके खिलाफ एकतरफा फैसला लेना उचित नहीं है। मामले के मुताबिक, PHED ने मेसर्स एनएस इंटरप्राइजेज के 57 अनुबंध रद्द कर दिए थे। विभाग ने बैंक गारंटी और सुरक्षा राशि से संबंधित दस्तावेजों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया। ठेकेदार ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत में कहा कि विभाग ने उसे पहले कोई नोटिस नहीं दिया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया।

विवाद अररिया और फारबिसगंज प्रखंडों में ‘हर घर नल का जल’ और मुख्यमंत्री निश्चय योजना के तहत कराए गए कार्यों से संबंधित है। ठेकेदार के अनुसार, उसने योजना के तहत निर्धारित काम पूरे कर दिए थे। विभाग की ओर से काम संतोषजनक होने का प्रमाणपत्र भी जारी किया गया था। इसके बावजूद कंपनी को उसके काम का पूरा भुगतान नहीं मिला। बकाया राशि के भुगतान की मांग पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 70 का उल्लेख किया। अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि जब किसी पक्ष के काम या सेवाओं का लाभ लिया गया हो, तो कानून के अनुसार उसके भुगतान की जिम्मेदारी पर विचार करना जरूरी है। इसी आधार पर विभाग को बकाया रकम ब्याज सहित चुकाने का निर्देश दिया गया। अदालत ने अनुबंध रद्द करने और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई को निरस्त करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि विभाग चाहे तो बैंक गारंटी और अन्य दस्तावेजों की जांच दोबारा कर सकता है। लेकिन इसके लिए उसे कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनानी होगी और संबंधित कंपनी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *