भागलपुर और कोसी-सीमांचल को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु पर बुधवार यानी 30 सितंबर की आधी रात से वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो जाएगा। पुल बंद होने के बाद गुरुवार 1 अक्टूबर से यात्रियों की आवाजाही के लिए गंगा नदी में बड़े जलयानों यानी फेरी सेवा का संचालन शुरू किया जाएगा। विक्रमशिला सेतु के बंद रहने के दौरान यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की है। पुल के बेली ब्रिज को सुरक्षित तरीके से हटाने और सेतु से जुड़े पुनर्स्थापन कार्य के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी BRO की तकनीकी टीम भी भागलपुर पहुंच चुकी है। यात्रियों के लिए पूरी तरह मुफ्त होगी फेरी सेवा, तीन बड़े जलयान किए गए तैयार पुल बंद होने के बाद शुरू होने वाली फेरी सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें यात्रियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यात्री अपने सामान के साथ साइकिल और मोटरसाइकिल भी मुफ्त में गंगा पार कर सकेंगे। फेरी सेवा 1 अक्टूबर 2026 से नियमित रूप से शुरू होगी। इसके लिए भागलपुर और नवगछिया की ओर तीन प्रमुख घाटों को तैयार किया गया है। भागलपुर की तरफ बियाडा घाट और बाबूपुर घाट से जलयान चलेंगे, जबकि नवगछिया की तरफ जाहन्वी गंगा घाट को मुख्य केंद्र बनाया गया है। बाबूपुर गंगा घाट पर यात्रियों की सुविधा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। घाट तक पहुंचने के लिए ग्रामीण सड़क से एप्रोच रोड तैयार की गई है। यात्रियों के बैठने और इंतजार करने के लिए वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं। घाट पर तीन बड़े जलयान भी खड़े किए गए हैं। इन जलयानों में यात्री, उनका सामान और दोपहिया वाहन एक साथ सुरक्षित तरीके से गंगा पार कर सकेंगे। बियाडा घाट पर भी बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। शहर के नजदीक होने के कारण इसे प्रमुख जलमार्ग केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां समतलीकरण के साथ टेंट और हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था की गई है। घाट पर दो जलयान किनारे और दो गंगा की धारा में तैयार रखे गए हैं। सामान्य नावों के संचालन पर रोक, 24 घंटे काम करेगा कंट्रोल रूम यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल सामान्य देशी नावों के संचालन पर रोक रहेगी। गंगा में केवल प्रशासन की ओर से अधिकृत बड़े जलयान ही चलाए जाएंगे। हर जलयान पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती रहेगी। इसके अलावा आपदा मित्र भी मौजूद रहेंगे। घाटों पर मेडिकल कैंप, पेयजल, रोशनी और ‘दीदी की रसोई’ की व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रियों को जरूरी सुविधाएं मिल सकें। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी व्यापक तैयारी की है। सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल और आपदा मित्रों की तैनाती की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम भी काम करेगा। भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने बताया कि 30 सितंबर की रात से विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का परिचालन रोक दिया जाएगा। इसके बाद यात्रियों की जरूरत के अनुसार गंगा में छोटे और बड़े जलयानों का संचालन किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अति आवश्यक होने पर ही जलमार्ग से यात्रा करें और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। बियाडा घाट पर बढ़ सकता है यात्रियों का दबाव विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद बियाडा घाट पर यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। शहर के नजदीक होने के कारण बड़ी संख्या में लोग इसी घाट का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में सीमित जगह के कारण यहां यात्रियों का दबाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसी को देखते हुए घाट पर पहले से ही जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की संख्या और जरूरत के अनुसार जलयानों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद कुछ समय के लिए सड़क के बजाय गंगा जलमार्ग यात्रियों के लिए अहम विकल्प बनेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि पुल से जुड़े काम के दौरान लोगों की आवाजाही सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से जारी रहे। Post navigation जमुई: वीडियो देखा तो पिता के उड़ गए होश… कमरे में चुपचाप लेटा था बेटा, फिर सामने आई मड़वा पहाड़ की दर्दनाक कहानी