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धनबाद के गोविंदपुर में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की धनबाद जिला इकाई की बैठक हुई। बैठक गोविंदपुर के भीतिया मोड़ स्थित आंदोलनकारी रति रंजन गिरि के आवास पर आयोजित की गई। बैठक में झारखंड आंदोलन के अमर पुरोधा स्वर्गीय टेकलाल महतो की पुण्यतिथि को याद किया गया। इस दौरान आंदोलनकारियों के अधिकार, सम्मान और उनके बच्चों के रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से 29 सितंबर को मशाल जुलूस और 30 सितंबर को झारखंड बंद को सफल बनाने का निर्णय लिया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनके बच्चों को रोजी-रोजगार और नौकरियों में अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही झारखंड आंदोलनकारियों के स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा की मांग को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया।

बैठक के मुख्य अतिथि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के गौरवशाली इतिहास को धूमिल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1973 में विनोद बिहारी महतो, ए.के. राय और दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने धनबाद की धरती से झारखंड अलग राज्य आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया था। इसी आंदोलन ने अलग झारखंड राज्य की बुनियाद मजबूत की। पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड राज्य बनने के बाद भी आंदोलन के प्रमुख नेताओं और आंदोलनकारियों को वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के महापुरुषों को गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से झारखंड आंदोलन का सर्वोच्च सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आंदोलनकारी अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों के सामने झारखंड आंदोलन का गौरवशाली इतिहास कमजोर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए 29 सितंबर को मशाल जुलूस और 30 सितंबर को झारखंड बंद का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी अपने बच्चों के अधिकार, रोजगार और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सड़क पर उतरेंगे। मोर्चा के वरीय उपाध्यक्ष दयाल महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों की पहचान को मिटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने झारखंड अलग राज्य के लिए संघर्ष किया है और आगे भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे। केंद्रीय उपाध्यक्ष गोपाल रवानी ने कहा कि आंदोलनकारियों के अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रहेगा। इसी उद्देश्य से 29 सितंबर को मशाल जुलूस और 30 सितंबर को झारखंड बंद का आह्वान किया गया है। केंद्रीय सचिव जगत महतो ने कहा कि झारखंड राज्य बनने के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों को अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि आंदोलनकारी अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और सरकार से अपनी मांगें मनवाने का प्रयास करेंगे।

बैठक का संचालन करते हुए आंदोलनकारी रति रंजन गिरि ने कहा कि सरकार झारखंड की माटी, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के अधिकारों और झारखंड की पहचान से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाने की जरूरत है। बैठक में दिलीप गोस्वामी, रेंघु साव, इमामुद्दीन अंसारी, मोइन अंसारी, राजेश महतो, विक्रम यादव, सुखलाल सोरेन, जीतू साहू, जागरण मरांडी, पंचानंद रजक, रूपलाल दास, किस्टू सोरेन, कृष्ण प्रसाद साव, शंकर प्रसाद साव, दर्शन माझी, असलम अंसारी, करामत हुसैन, अब्बास अंसारी, बरसा माझी, दुर्गा गोसाई, दिनेश मंडल, दिलीप कुमार भारती, विश्वनाथ पाल, चंपई हंसदा सहित कई आंदोलनकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में झारखंड आंदोलन के अमर पुरोधा स्वर्गीय टेकलाल महतो को याद करते हुए ‘टेकलाल महतो अमर रहें’ के नारे लगाए गए। इसके साथ ही झारखंड आंदोलनकारी सरफुद्दीन अंसारी के आकस्मिक निधन पर शोक जताया गया और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

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