हजारीबाग के आकाशदीप होटल के सभागार में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा, अखिल भारतीय किसान सभा, झारखंड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा, झारखंड आंदोलनकारी युवा मोर्चा और खतियानी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में झारखंड आंदोलनकारियों, किसानों, विस्थापितों और मजदूरों के अधिकारों, सम्मान और उनके स्वाभिमान के साथ जीवन जीने के मुद्दों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में संगठनों ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों, किसानों और विस्थापितों की समस्याओं को लेकर सरकार को कई बार मांगों और आश्वासनों से अवगत कराया गया है। उनका कहना है कि यदि सरकार सरकारी संकल्प और पूर्व में दिए गए आश्वासनों को लागू नहीं करती है तथा आंदोलनकारियों, किसानों और विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संयुक्त सम्मेलन में 29 सितंबर को मशाल जुलूस निकालने और 30 सितंबर को झारखंड बंद का निर्णय लिया गया। सम्मेलन में शामिल नेताओं ने कहा कि बंद के जरिए सरकार तक अपनी मांगों को मजबूती से पहुंचाया जाएगा। आंदोलनकारियों, किसानों और विस्थापितों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा -भुवनेश्वर प्रसाद मेहता पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों, किसानों और विस्थापितों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने 30 सितंबर के झारखंड बंद को सफल बनाने का आह्वान किया। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष विदेशी महतो ने कहा कि झारखंड के अस्तित्व, अस्मिता और पहचान से जुड़े मुद्दों के लिए लोगों को जाति, पार्टी और धर्म की भावनाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को मजबूत करना जरूरी है। मोर्चा की कार्यकारी अध्यक्ष रोजलीन तिर्की ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ी के अधिकारों की रक्षा के लिए भी आगे आना होगा। उन्होंने 30 सितंबर के बंद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। 30 सितंबर को संपूर्ण झारखंड बंद किया जाएगा – पुष्कर महतो झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने सरकार से झारखंड आंदोलनकारियों की विभिन्न मांगों को पूरा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को रोजगार और नौकरी में अधिकार देने, जेल जाने की बाध्यता से जुड़े प्रावधानों को दूर करने तथा सम्मान पेंशन की राशि 50 हजार रुपये करने के आश्वासन को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 30 सितंबर को संपूर्ण झारखंड बंद किया जाएगा। उन्होंने इसे सरकार के लिए चेतावनी बताया। विचार मंच के संयोजक बालेश्वर प्रसाद मेहता ने भी झारखंड की जनता को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष को मजबूत करने की बात कही। सम्मेलन में वक्ताओं ने भ्रष्टाचार समेत अन्य जनसमस्याओं पर भी चिंता जताई और सरकार से लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। सम्मेलन में जासो देवी, हसनैन अंसारी, हकीम खां, सुनीता टोपनो, निरीज कच्छप, राजेश कुमार, गोपाल माली, अधिवक्ता रमेश सिंह, विनोद पांडेय, निजाम अंसारी, सोहन लाल महतो, सैय्यद अहमद, रेशमा प्रवीण, इंद्रमणी देवी, गयासुद्दीन अंसारी, महमूद आलम, मो. असलम, सुरेश महतो, अमानुल्ला, केदार महतो, नागो बैठा, दिल चंद राम, कृष्ण राम, श्रीकांत मेहता, फागू माझी, कुंजीलाल साव, शमीम खान, भोला गुप्ता, सबूर मेहता, कुलेश्वर पासवान, सुनील कुमार पासवान, जय कुमार रजक, प्रभु बैठा, अर्जुन मेहता, कुलदीप प्रसाद मेहता, कैलाश सिंह, विजय यादव, अनिल कुमार कुशवाहा, सत्यदेव राय, कामेश्वर महतो समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। Post navigation क्यों हुई रद्द JSSC-CGL परीक्षा? सरकार ने शपथ पत्र में रखा अपना पक्ष