झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) में कथित गड़बड़ी की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही CID की विशेष टीम ने रांची और हजारीबाग में कई ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान जांच टीम ने दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं। CID की जांच अब कथित परीक्षा सिंडिकेट, कोचिंग संस्थानों और बिचौलियों के बीच कनेक्शन को खंगालने में जुटी है। जांच एजेंसी को शक है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा में फायदा पहुंचाने के लिए पहले से कथित तौर पर सेटिंग की गई थी। रांची के कोचिंग संस्थान और संचालक, हजारीबाग के मेघा कोचिंग सेंटर में भी जांच CID की टीम ने रांची के लालपुर स्थित शिवांगन की पाठशाला में छापेमारी की। इसके अलावा संस्थान के निदेशक-संचालक संजीत कुमार के रातू रोड स्थित आवास पर भी जांच की गई। जांच टीम ने संस्थान से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। CID सूत्रों के अनुसार, यहां से अभ्यर्थियों से कथित लेन-देन और संपर्क से जुड़े कुछ दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कुछ अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा में मदद के लिए कथित तौर पर कोई डील हुई थी। रांची के अलावा CID की टीम ने हजारीबाग स्थित मेघा कोचिंग सेंटर में भी छापेमारी की। यहां मौजूद दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई। CID को शक है कि कथित परीक्षा सिंडिकेट में कुछ कोचिंग संचालकों और बिचौलियों की भूमिका हो सकती है। पहले गिरफ्तार किए गए एजेंटों और कुछ चयनित अभ्यर्थियों से पूछताछ के दौरान इन संस्थानों से जुड़े नाम सामने आने की बात कही जा रही है। कोचिंग के जरिए अभ्यर्थियों से संपर्क का आरोप जांच एजेंसी के अनुसार, कथित सिंडिकेट अभ्यर्थियों की पहचान करने के लिए कोचिंग संस्थानों और बिचौलियों का इस्तेमाल करता था। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर CID यह पता लगाने में जुटी है कि किन अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया था, कितने पैसे की कथित डील हुई और रकम किस-किस व्यक्ति तक पहुंची। अब CID अभ्यर्थियों के डेटा, बैंक खातों में हुए लेन-देन और संदिग्ध लोगों की भूमिका का मिलान कर रही है। इस मामले में जांच का एक अहम पहलू OMR शीट से जुड़ा बताया जा रहा है। CID को कथित तौर पर जानकारी मिली है कि कुछ सेटिंग वाले अभ्यर्थियों ने खाली OMR शीट जमा की थी और बाद में उसे भरने की बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरे आरोप की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि OMR शीट में कथित तौर पर हेराफेरी कैसे और किस स्तर पर की गई। इसके अलावा परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र कथित तौर पर कोचिंग संस्थानों तक पहुंचने और एक्सपर्ट से प्रश्न हल कराने के आरोपों की भी जांच चल रही है। अब तक 22 गिरफ्तार, सात की तलाश, JSSC-CGL मामले में भी पूछताछ जारी JPSC मामले की जांच के दौरान CID अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, सात नामजद या संदिग्ध आरोपियों के अभी फरार होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। CID को उम्मीद है कि इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद कथित परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं। इधर, JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी से भी CID की SIT पूछताछ कर रही है। तीनों से आमने-सामने पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से कितने पैसे लिए गए, पैसा किन लोगों तक पहुंचा और परीक्षा से पहले किसी तरह की जानकारी या प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था या नहीं। CID ने अभय कुमार तिवारी को पांच दिन, जबकि सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी को तीन दिन की रिमांड पर लिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ खुल सकते हैं कई राज JPSC 14वीं सिविल सेवा PT और JSSC-CGL से जुड़े मामलों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े नए नाम और कड़ियां सामने आने की संभावना है। फिलहाल CID का फोकस कोचिंग संस्थानों, बिचौलियों, अभ्यर्थियों के बीच कथित लेन-देन, OMR शीट में हेराफेरी और प्रश्नपत्र से जुड़ी संभावित गड़बड़ी की जांच पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित धांधली किस स्तर तक हुई थी। Post navigation झारखंड में 25 से 27 अगस्त तक भारी बारिश के आसार, रांची समेत कई जिलों में अलर्ट JPSC-JSSC धांधली मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच की मांग पर झारखंड सरकार और JPSC को नोटिस