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झारखंड आंदोलनकारियों के बाल-बच्चों और आश्रितों को मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण के अधिकार को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने सरकार से सवाल किया है। मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूछा है कि आंदोलनकारियों के आश्रितों को आरक्षण का अधिकार देने के सरकार के फैसले के बावजूद इसे भर्ती प्रक्रियाओं में लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बुधवार को कांके रोड स्थित सचिवालय में मुख्यमंत्री के नाम लिखित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने और आरक्षण के प्रावधान को सही तरीके से लागू करने की मांग की है।

पुष्कर महतो ने अपने ज्ञापन में कहा है कि झारखंड आंदोलनकारियों के आश्रितों और बाल-बच्चों को क्षैतिज आरक्षण देने से संबंधित गजट नोटिफिकेशन 22 अप्रैल 2025 को जारी किया जा चुका है। इसके बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की ओर से एक भर्ती में आंदोलनकारियों के आश्रितों और बाल-बच्चों के लिए क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान आवेदन में दिया गया था। उन्होंने कहा कि कक्षपाल की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में पहली बार आंदोलनकारियों के आश्रितों और बाल-बच्चों के लिए क्षैतिज आरक्षण का कॉलम दिया गया था। इसके आधार पर पात्र अभ्यर्थियों ने आवेदन भी किया। लेकिन बाद में इस वैकेंसी को ही रद्द कर दिया गया और रिक्तियों को संविदा के आधार पर भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। सवाल उठाया गया कि आखिर यह भर्ती रद्द क्यों की गई और इसके पीछे किसका निर्णय था। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने आंदोलनकारियों के आश्रितों को क्षैतिज आरक्षण देने का फैसला किया है, तो भर्ती प्रक्रिया में इसका पालन क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि सरकार के अपने ही संकल्प और निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं होना गंभीर मामला है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। महतो का कहना है कि अगर किसी स्तर पर सरकार के फैसले या आरक्षण के प्रावधान का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पुष्कर महतो ने यह भी आरोप लगाया कि सचिवालय और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कुछ नई नियुक्ति प्रक्रियाओं में भी आंदोलनकारियों के आश्रितों और बाल-बच्चों के लिए क्षैतिज आरक्षण का कॉलम नहीं दिया गया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है, तो नई नियुक्तियों के आवेदन में इसका उल्लेख क्यों नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। महतो का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि झारखंड आंदोलनकारियों के आश्रितों और उनके बाल-बच्चों को उनके अधिकार से वंचित न किया जाए। पुष्कर महतो ने कहा कि आंदोलनकारियों ने अलग झारखंड राज्य के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और अपना जीवन, समय और भविष्य इस आंदोलन में लगाया। ऐसे में उनके परिवारों को सम्मान और रोजगार का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से आंदोलनकारियों के आश्रितों और बाल-बच्चों की योग्यता के आधार पर सीधी नियुक्ति की व्यवस्था करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के बाल-बच्चों के रोजगार और नौकरी के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। किसी भी बाहरी दबाव या ताकत के कारण उनके अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। साथ ही उन्होंने संविधान में राज्य से जुड़े प्रावधानों और सरकार के अपने संकल्प का पूरी तरह पालन करने की मांग की। पुष्कर महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराए और जहां भी आरक्षण के प्रावधान का पालन नहीं हुआ है, वहां आवश्यक सुधार किया जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों और उनके परिवारों को केवल सम्मान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके अधिकारों की भी रक्षा करनी होगी। सरकार आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को न्याय, सम्मान और समाज में स्वाभिमान के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित करे।

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