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झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से चल रहे आंदोलन को छात्र प्रतिनिधियों ने फिलहाल रोक दिया है। हालांकि, छात्रों ने साफ कर दिया है कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर 60 दिनों के भीतर उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एक बार फिर आंदोलन शुरू करेंगे। छात्रों की सबसे बड़ी मांग JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की CBI जांच कराने की है।

JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर 25 जुलाई से छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुट रहे थे। धीरे-धीरे यह आंदोलन बड़ा होता गया और राज्य के अलग-अलग जिलों से छात्र रांची पहुंचने लगे। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं उनके कई वर्षों की मेहनत और भविष्य से जुड़ी होती हैं। एक परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी या धांधली के आरोप सामने आते हैं, तो इससे हजारों अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित होता है। आंदोलन के दौरान छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। इसलिए आंदोलन को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि दो महीने के लिए स्थगित किया गया है। छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर इस अवधि में परीक्षा में कथित गड़बड़ी की CBI जांच को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे। छात्रों का कहना है कि सरकार की कार्रवाई और जांच की दिशा पर उनकी नजर बनी रहेगी। अगर उन्हें लगा कि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तो वे फिर से बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे।

कई दिनों तक छात्रों की भीड़ और आंदोलन का केंद्र बना जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम अब धीरे-धीरे खाली होने लगा है। आंदोलन स्थगित होने के बाद स्टेडियम में लगाए गए टेंट हटाए जा रहे हैं। छात्र भी अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। पिछले कई हफ्तों से यह स्टेडियम छात्रों के आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ था। यहां राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्र एक साथ बैठकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे। स्टेडियम में लगे टेंट, छात्रों की भीड़ और लगातार चलने वाली बैठकों के कारण यह जगह झारखंड के छात्र आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गई थी। अब आंदोलन स्थगित होने के बाद मैदान धीरे-धीरे अपने पुराने स्वरूप में लौट रहा है।

छात्रों के अनुसार, उनके आंदोलन का असर अब दिखाई देने लगा है। सरकार ने JPSC और JSSC से जुड़ी कई परीक्षाओं को रद्द करने और कुछ अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने का फैसला लिया है। सरकार की ओर से 22 परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा है। इसके अलावा कई अन्य परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की भी उच्चस्तरीय जांच की जा रही है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं था। उनका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना तथा अभ्यर्थियों के भरोसे को मजबूत करना था। आंदोलन स्थगित करने के दौरान छात्रों ने साफ किया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। 60 दिनों का समय सरकार को दिया गया है ताकि वह उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई कर सके। छात्रों की सबसे प्रमुख मांग परीक्षा में कथित धांधली की CBI जांच है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होती है तो सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। छात्रों ने कहा कि अगर सरकार 60 दिनों के अंदर उनकी मांगों पर संतोषजनक कदम उठाती है तो आगे की स्थिति पर विचार किया जाएगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।

25 जुलाई से शुरू हुआ यह आंदोलन अब झारखंड के छात्र आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। कई दिनों तक हजारों छात्रों की मौजूदगी, बारिश के बीच प्रदर्शन और लगातार उठती मांगों ने इस आंदोलन को व्यापक रूप दिया। अब जब छात्र अपने घर लौट रहे हैं और स्टेडियम से टेंट हटाए जा रहे हैं, तब भी आंदोलन की मांगें खत्म नहीं हुई हैं। मैदान शांत जरूर हो रहा है, लेकिन छात्रों ने सरकार को 60 दिनों का समय देकर साफ कर दिया है कि अगर CBI जांच की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुई आवाज एक बार फिर सड़कों पर सुनाई दे सकती है। फिलहाल छात्रों ने आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित कर दिया है और अब सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है।

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