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पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त के निर्देश पर पटमदा-बोड़ाम प्रखंड क्षेत्र के झारखंड आंदोलनकारियों के बीच सम्मान पत्र का वितरण किया गया। सम्मान पत्र मिलने के बाद आंदोलनकारियों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। लंबे संघर्ष के बाद सम्मान मिलने को उन्होंने अपने आंदोलन और बलिदान की पहचान बताया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक मंगल कालिंदी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य आंदोलनकारियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। आंदोलनकारियों ने अलग राज्य के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और कई तरह की परेशानियां झेलीं। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों का सम्मान करना पूरे झारखंड का सम्मान है। पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस ने भी आंदोलनकारियों के संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने राज्य के निर्माण के लिए अपना जीवन लगा दिया। उनके संघर्ष का कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता। आंदोलनकारियों को उचित सम्मान और अधिकार मिलना जरूरी है।

कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने आंदोलनकारियों के अधिकारों को लेकर सरकार के सामने कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि झारखंड के लोगों को राज्य के खनिज संसाधनों पर 26 प्रतिशत रॉयल्टी का अधिकार मिलना चाहिए। पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि यहां के लोगों का स्वाभिमान है। स्वाभिमान से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से मांग की कि झारखंड आंदोलनकारियों को न्याय के साथ सम्मान दिया जाए और उन्हें समाज में स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को केवल सम्मान पत्र देने से उनकी सभी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। सरकार को उनके लिए ठोस व्यवस्था करनी चाहिए। आंदोलनकारियों को राजकीय सम्मान, अलग पहचान और उनके बच्चों को 100 प्रतिशत नौकरी का लाभ दिया जाना चाहिए। पुष्कर महतो ने यह भी मांग की कि आंदोलनकारी होने के लिए जेल जाने की बाध्यता को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में योगदान दिया है, उन्हें सम्मान देने के लिए सभी आंदोलनकारियों को 50-50 हजार रुपये की सम्मान राशि दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान करते हुए उनके सम्मान और अधिकार को सुनिश्चित करना चाहिए।

सम्मान पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान आंदोलनकारियों के बीच खास उत्साह देखने को मिला। लंबे समय बाद सरकारी स्तर पर सम्मान पत्र मिलने से आंदोलनकारियों में खुशी थी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि यह सम्मान उनके संघर्ष की पहचान है और आने वाली पीढ़ियों को भी झारखंड आंदोलन के इतिहास और आंदोलनकारियों के योगदान के बारे में जानकारी मिलेगी। कार्यक्रम में रोजलीन तिर्की, विश्वजीत प्रमाणिक, शिबू काली मैती, मिहिर तिवारी, शरत महतो, रामनाथ महतो समेत कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार से उनकी लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। वहीं, पुष्कर महतो ने साफ कहा कि आंदोलनकारियों के सम्मान और झारखंड के अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

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