कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस मुद्दे को लेकर सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और राज्यसभा सांसद खीरू महतो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें मांग-पत्र सौंपा। कुड़माली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषायी पहचान प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री को बताया कि कुड़माली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषायी पहचान से जुड़ी हुई है। यह भाषा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर सहित जंगलमहल क्षेत्र में बोली जाती है। इसके अलावा झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां सहित कई इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोग कुड़माली बोलते और समझते हैं। ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ में भी कुड़माली भाषी लोग रहते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कुड़माली की अपनी समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत है। इसमें लोकगीत, लोककथाएं, कविताएं और मौखिक परंपराओं का लंबा इतिहास रहा है। झुमर, टुसू, करम और छऊ जैसी लोक-सांस्कृतिक परंपराओं से भी कुड़माली भाषा का गहरा संबंध है। कुड़माली भाषा में शिक्षा, साहित्य और शोध के काम को भी मिलेगा प्रोत्साहन सांसदों ने कहा कि कुड़माली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने से भाषा के संरक्षण और विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे कुड़माली भाषा में शिक्षा, साहित्य और शोध के काम को भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, कुड़माली भाषी समाज की सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक स्तर पर सम्मान प्राप्त होगा। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी मांग को गंभीरता से सुना। उन्होंने कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को उचित और व्यापक जनहित से जुड़ा विषय बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं और उनके साहित्य के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है और कुड़माली सहित लंबित भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। गृह मंत्री के इस आश्वासन को कुड़माली भाषी समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सांसदों ने उम्मीद जताई कि कुड़माली भाषा को जल्द ही संवैधानिक पहचान मिलेगी और इसकी समृद्ध भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। सांसदों ने कहा कि कुड़माली भाषा की पहचान का सम्मान वास्तव में उसकी संस्कृति और विरासत का सम्मान है। उन्होंने भरोसा जताया कि कुड़माली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का प्रयास आगे भी जारी रहेगा। Post navigation भाजपा ने की 11 अगस्त को झारखंड बंद की घोषणा 30 हजार फीट की ऊंचाई पर अचानक बंद हुआ ऑटो-पायलट, फर्श पर मिला पायलट… फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में आखिर क्या हुआ?