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रांची के चुटिया स्थित मकचुंद टोली में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया और झारखंड आंदोलनकारियों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द सम्मान पेंशन देने और उनके परिवारों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की मांग की। बैठक में कहा गया कि 10 जून को सरकार की ओर से आंदोलनकारियों को कुछ आश्वासन दिए गए थे। अब आंदोलनकारी चाहते हैं कि राज्य स्थापना दिवस 15 नवंबर से पहले उन सभी आश्वासनों को धरातल पर लागू किया जाए। उनका कहना है कि झारखंड राज्य के निर्माण में आंदोलनकारियों की बड़ी भूमिका रही है, इसलिए उन्हें सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए।

झारखंड आंदोलनकारियों को मिले सम्मान और पहचान – पुष्कर महतो

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो 15 नवंबर को रांची में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि करीब 50 हजार आंदोलनकारी अल्बर्ट एक्का चौक से बिरसा चौक तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करेंगे। बैठक में पाकुड़ के अमड़ापाड़ा क्षेत्र में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा द्वारा संचालित दिशोम गुरु शिबू सोरेन पब्लिक स्कूल की भी सराहना की गई। इस स्कूल में पहाड़िया आदिम जनजाति के करीब 120 बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। आंदोलनकारियों ने इसे समाज के लिए एक सकारात्मक पहल बताया। साथ ही भारत सरकार द्वारा झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर भी खुशी जाहिर की गई और केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया गया। मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार को झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों के लिए साहसिक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड का इतिहास आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से भरा हुआ है। आंदोलनकारियों ने वर्षों तक शोषण, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिसके परिणामस्वरूप अलग झारखंड राज्य का निर्माण संभव हो सका। उन्होंने खरसावां, गुवा, चिरूडीह, सिमको, मिहिजाम, पलमा, विष्णुगढ़, सेरेंगदा और तपकरा जैसे गोलीकांडों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों ने अपने अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए जान गंवाई। उनका कहना था कि आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष से झारखंडी पहचान को बचाए रखा, लेकिन आज भी कई आंदोलनकारी सम्मान और पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आंदोलनकारी बड़े स्तर पर “महाउलगुलान” करने के लिए मजबूर होंगे – विदेशी महतो

मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष विदेशी महतो ने कहा कि यदि सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए तो आंदोलनकारी बड़े स्तर पर “महाउलगुलान” करने के लिए मजबूर होंगे। वहीं केंद्रीय सचिव पुनीत उरांव ने कहा कि झारखंड राज्य बनने से पहले भी आंदोलन करना पड़ा था और आज राज्य बनने के वर्षों बाद भी आंदोलनकारियों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी पड़ रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्रीय सचिव तैयब अंसारी ने कहा कि आंदोलनकारी अपनी पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन का इतिहास मिटाया नहीं जा सकता और आंदोलनकारी अपने अधिकारों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। बैठक में बड़ी संख्या में आंदोलनकारी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। संचालन अनथन लकड़ा स्वागत भाषण सुबोध कुमार लकड़ा ने की. सरोजनी कच्छप, रोजलीन तिर्की, सूरज प्रसाद जायसवाल,जीतन कोल, भारदुल भुइयां, टहलू महतो, नारायण राणा,हसनैन अंसारी, विनोद कुमार पांडेय, ऋषितोष झा, राजदेव महथा ,सविता सिंह, मीना कुमारी,नीलू देवी,पुनीत उरांव, प्रकाश खलखो, शकील अख्तर, लड्डू पांडेय, फिरोज अहमद, अमर भेंगरा, पुनीत टोप्पो, खगेंद्र नाथ वर्मा, जयप्रकाश साह, मणिलाल मांझी, मनोहर सिंह, मोइन अंसारी, असलम अंसारी, रंजन बाड़ा, विश्वनाथ प्रसाद, चंद्रधन सिंह, विजय उरांव, तपन कुमार पांडेय,राजेश लकड़ा, रंजीत टोप्पो, हीरा प्रधान, फिरोज अहमद सहित झारखण्ड के अलग अलग जिलों से आंदोलनकारी गण उपस्थित हुए.सभी ने एक स्वर में सरकार से आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से लेने और जल्द से जल्द उचित निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना था कि आंदोलनकारियों का सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि झारखंड के गौरव और इतिहास के सम्मान का भी प्रश्न है।

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