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राजधानी रांची में संचालित अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को अब मरीजों से जुड़ी जरूरी जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। इनमें इलाज की फीस, जांच का खर्च, बेड का किराया, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल काउंसिल में उनके पंजीकरण का विवरण शामिल है। इसके अलावा, अस्पतालों को अपना वैध रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र और मरीजों के अधिकारों से संबंधित जानकारी भी प्रमुख स्थान पर लगानी होगी। इस संबंध में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रांची के कार्यालय ने 29 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी किया है। कार्यालय आदेश संख्या 5236 के तहत सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों को सात दिनों के भीतर निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। आदेश का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इस आदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इलाज और चिकित्सा सेवाओं की दरों को सार्वजनिक करना है। अब अस्पतालों और क्लीनिकों को अपनी अद्यतन दर सूची ऐसी जगह लगानी होगी, जहां मरीज और उनके परिजन उसे आसानी से देख सकें। दर सूची में डॉक्टरों की परामर्श फीस, विभिन्न जांचों का शुल्क, चिकित्सा प्रक्रियाओं का खर्च, बेड का किराया और अन्य लागू सेवा शुल्क का स्पष्ट विवरण देना होगा। इससे मरीजों को इलाज शुरू कराने से पहले संबंधित सेवाओं की दरों की जानकारी मिल सकेगी। कई बार मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के दौरान अलग-अलग सेवाओं के शुल्क की जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में खर्च को लेकर भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। दर सूची सार्वजनिक होने से मरीजों को संभावित खर्च का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि, आदेश में अस्पतालों के लिए किसी विशेष सेवा की फीस तय नहीं की गई है। संस्थानों को अपनी लागू दरों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है।

अस्पतालों और क्लीनिकों को वहां काम करने वाले डॉक्टरों से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी। इसमें डॉक्टर का नाम, शैक्षणिक योग्यता, संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और परामर्श या ड्यूटी का समय शामिल होगा। इससे मरीजों को पता चल सकेगा कि अस्पताल में कौन-कौन से डॉक्टर उपलब्ध हैं और वे किस बीमारी या चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। डॉक्टरों की योग्यता और पंजीकरण की जानकारी मिलने से मरीज अपनी जरूरत के अनुसार चिकित्सक का चयन करने में भी अधिक सक्षम होंगे। सिविल सर्जन कार्यालय के आदेश के अनुसार, प्रत्येक संबंधित चिकित्सा संस्थान को सक्षम प्राधिकार की ओर से जारी वैध और अद्यतन रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र या लाइसेंस भी प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना होगा। इसे अस्पताल के रिसेप्शन या ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जहां आने वाले मरीजों और आम लोगों की आसानी से नजर पड़ सके। इससे मरीज यह जान सकेंगे कि संबंधित चिकित्सा संस्थान का पंजीकरण वैध है या नहीं।

आदेश में अस्पतालों को केवल फीस और डॉक्टरों की जानकारी प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं रखा गया है। उन्हें वहां उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं का विवरण भी सार्वजनिक करना होगा। इसके साथ ही मरीजों के अधिकारों, शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था और लागू नियमों के तहत जरूरी अन्य जानकारियां भी प्रदर्शित करनी होंगी। इससे किसी तरह की समस्या होने पर मरीजों और उनके परिजनों को शिकायत करने की प्रक्रिया समझने में आसानी होगी।

सिविल सर्जन कार्यालय के अनुसार, सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा के आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से मिले अनुरोध के संदर्भ में यह निर्देश जारी किया गया है। अनुरोध में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट यानी चिकित्सा प्रतिष्ठान अधिनियम के प्रावधानों के पालन का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद रांची जिले में संचालित सभी संबंधित अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों और अन्य चिकित्सा प्रतिष्ठानों को निर्देश जारी किए गए। आदेश का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों को इलाज से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है। आदेश में संबंधित संस्थानों को जारी होने की तारीख से सात दिनों के भीतर निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही, इन व्यवस्थाओं को लगातार बनाए रखना होगा। निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को अस्पतालों और क्लीनिकों में जाकर यह जांचने की जिम्मेदारी दी गई है कि निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। यदि निरीक्षण के दौरान किसी संस्थान में कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसकी जानकारी सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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