झारखंड की उपराजधानी दुमका के महुआडंगाल इलाके में शनिवार सुबह अचानक हुई वन विभाग और जिला पुलिस की संयुक्त छापेमारी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जिस घर पर कार्रवाई की गई, वह पंकज रावत का बताया जा रहा है, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री के पूर्व आप्त सचिव विवेक रावत का भतीजा बताया जाता है। कार्रवाई कई घंटों तक चली और इलाके में तनाव तथा चर्चा का माहौल बना रहा। सुबह-सुबह भारी पुलिस बल के साथ घेराबंदी सूत्रों के अनुसार, छापेमारी का नेतृत्व एक प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी कर रहे थे। टीम में वन विभाग के 20 से 25 फॉरेस्ट गार्ड, महिला पुलिस बल, नगर थाना और मुफस्सिल थाना की पुलिस शामिल थी। शनिवार सुबह टीम ने महुआडंगाल स्थित घर को चारों ओर से घेर लिया और फिर अंदर प्रवेश कर तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान घर के सभी कमरों, अलमारियों और अन्य हिस्सों की बारीकी से जांच की गई। यह अभियान कई घंटों तक लगातार चलता रहा। इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद वन विभाग और पुलिस के किसी अधिकारी ने मीडिया या स्थानीय लोगों को आधिकारिक जानकारी नहीं दी। टीम किस मामले की जांच के लिए पहुंची थी और क्या खोज रही थी, इस बारे में पूरी गोपनीयता बरती गई। कार्रवाई खत्म होने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि घर से कोई सामान बरामद हुआ या नहीं। स्थानीय लोगों ने मांगा लिखित प्रमाण तलाशी अभियान समाप्त होने के बाद वहां मौजूद स्थानीय लोगों और परिवार के सदस्यों ने अधिकारियों से लिखित रूप में यह प्रमाण देने की मांग की कि जांच के दौरान कोई अवैध या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है। हालांकि अधिकारियों ने मौके पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की और न ही किसी प्रकार का लिखित प्रमाण दिया। इसके बाद टीम वहां से चली गई। वन विभाग और पुलिस की ओर से अब तक इस छापेमारी के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। यही वजह है कि दुमका और राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए यह साफ नहीं है कि कार्रवाई किस मामले में की गई थी और जांच का आधार क्या था। जब तक विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं दी जाती, तब तक चल रही चर्चाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती। दुमका में हुई इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर वन विभाग और जिला पुलिस के आधिकारिक बयान पर टिकी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह कार्रवाई किस वजह से की गई और जांच में क्या सामने आया। Post navigation सरकार वादा निभाए, आंदोलनकारियों को मिले सम्मान: पुष्कर महतो